हरतालिका तीज : शुभ मुहूर्त पर करें पूजा
हरतालिका तीज : शुभ मुहूर्त पर करें पूजा
छत्तीसगढ़ में तीज अर्थात तीजा का खास महत्त्व है। इस दिन महिलाएं और युवतियां निर्जला व्रत रखकर गौरी-शंकर की पूजा करती हैं। हरतालिका तीज व्रत भाद्रपद की शुक्ल पक्ष की तृतीया को होता है। हरितालिका तीज के दिन निर्जला व्रत रखा जाता है। अर्थात पानी भी नहीं पीना चाहिए। छत्तीसगढ़ में एक प्रथा है कि इस दिन हर शादीशुदा महिला को उसके मायके से लेने आते हैं। जिसके पीछे कुछ प्रचलित दोहे भी हैं।
तीजा लेगे बर आही भइया सोर-संदेशा आगे
बड़े फजर ले कौंवा आके कांव-कांव नरियागे
साल भर ले रद्दा जोहत हौं ये भादो महीना के
पोरा पटक के जाबो मइके जोरन सबो जोरागे
तीज के पहले दूज के दिन यहां महिलाएं कड़ु-भात ( करेले की सब्जी और भात) खाने की परंपरा का पालन करती है। रात्रि बारह बजे के बाद से निर्जला व्रत शुरु होता है जो अगली रात बारह बजे तक चलता है। तीजा के दिन मायके से मिले कपड़े पहनकर जहां कहीं भी आस-पड़ोस में कथा बांचकर पूजा की जा रही हो वहां जाकर पूजा करती हैं। दूसरे दिन अर्थात चतुर्थी को ही भोजन ग्रहण होता है।
तीज तिथि प्रारम्भ -11 सितम्बर, 2018 को शाम को 06:05 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त – 12 सितम्बर, 2018 को दोपहर 04:07 बजे

संकल्प शक्ति का प्रतीक है हरतालिका तीज व्रत के लाभ
– अखंड सौभाग्य की कामना का व्रत है हरतालिका तीज
– भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को किया जाता है व्रत
– हरतालिका तीज को हरितालिका तीज और बूढ़ी तीज भी कहा जाता है
– इस दिन सास अपनी बहू को सिंधारा देती हैं।
हरतालिका तीज पूजन सामग्री
– गीली काली मिट्टी या बालू
– बेलपत्र, शमी पत्र, केले का पत्ता
– धतूरे का फल और फूल
– अकांव का फूल
– तुलसी, मंजरी, जनैव
– नाडा, वस्त्र, फुलहरा
– श्रीफल, कलश, अबीर
– चंदन, कपूर, कुमकुम, दीपक
– फल, फूल और पत्ते
मां पार्वती के लिए सुहाग सामग्री
– मेहंदी, चूड़ी, बिछिया
– काजल, बिंदी, कुमकुम
– सिंदूर, कंघी, माहौर, सुहाग पुड़ा
सौभाग्य पर्व ‘हरतालिका तीज’
– भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को किया जाता है व्रत
– शिव-पार्वती के पूजन का विधान
– हस्त नक्षत्र में होता है व्रत
– लड़कियां और सौभाग्यवती महिलाएं करती हैं व्रत
– विधवाएं भी कर सकती हैं व्रत
हरतालिका तीज पूजन विधि
– ‘उमामहेश्वरसायुज्य सिद्धये हरितालिका व्रतमहं करिष्ये’ जपते हुए व्रत का संकल्प लें
– प्रदोष काल में प्रारंभ करें पूजन
– सूर्यास्त से 1 घंटे के पहले का समय होता है प्रदोष काल
– शाम के समय स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें
– शिव-पार्वती और गणति की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर पूजा करें
– रेत या काली मिट्टी से बना सकते हैं प्रतिमा
– सुहाग की पिटारी में सुहाग सामग्री सजाकर रखें
– सभी वस्तुएं पार्वती जी को अर्पित करें
– शिव जी को धोती और अंगोछा अर्पित करें
– शिव-पार्वती का पूजन करें
– हरतालिका व्रत की कथा सुनें
– गणेशजी की आरती, फिर शिवजी और माता पार्वती की आरती करें
– भगवान की परिक्रमा करें
– रात्रि जागरण कर सुबह पूजा के बाद मां पार्वती को सिंदूर चढ़ाएं
– ककड़ी-हलवे का भोग लगाएं
– ककड़ी खाकर व्रत का पारण करें
– सभी सामग्री को पवित्र नदी या कुंड में विसर्जित करें
हरतालिका तीज मान्यताएं
– विधिपूर्वक व्रत करने से सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है
– दांपत्य जीवन में रहती है खुशी बरकरार
– मेहंदी लगाना और झूला-झूलना माना जाता है शुभ
– वैवाहिक जीवन से कष्ट दूर होता है
वेब डेस्क IBC24

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