महिला वकीलों को न्यायाधीश नियुक्त करने पर विचार करे उच्च न्यायालय कॉलेजियम : सीजेआई

महिला वकीलों को न्यायाधीश नियुक्त करने पर विचार करे उच्च न्यायालय कॉलेजियम : सीजेआई

महिला वकीलों को न्यायाधीश नियुक्त करने पर विचार करे उच्च न्यायालय कॉलेजियम : सीजेआई
Modified Date: March 8, 2026 / 06:52 pm IST
Published Date: March 8, 2026 6:52 pm IST

नयी दिल्ली, आठ मार्च (भाषा) भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने रविवार को न्यायपालिका में अधिक संस्थागत सुधारों की वकालत की, ताकि अधिक महिलाएं विधि क्षेत्र में आ सकें। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालयों के कॉलेजियम को न्यायाधीश पद के लिए बार की मेधावी महिला सदस्यों पर एक नियम के रूप में विचार करना चाहिए, न कि अपवाद के रूप में।

एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, सीजेआई ने इस बात पर जोर दिया कि बार के सदस्यों को एक साधारण सी वास्तविकता को स्वीकार करना चाहिए: महिला सदस्य रियायतें नहीं मांग रही हैं।

उन्होंने ‘इंडियन वीमन इन लॉ’ के पहले सम्मेलन में “हाफ द नेशन-हाफ द बेंच, ब्रिज द गैप-बैलेंस द बेंच” विषय पर कहा, “वे निष्पक्ष और उचित प्रतिनिधित्व की मांग कर रही हैं, जो लंबे समय से लंबित है। जब स्वयं यह पेशा इस सत्य को आत्मसात कर लेगा, तभी न्यायपालिका तक पहुंचने का मार्ग स्पष्ट होगा।” इस पर वहां मौजूद महिला वकीलों और न्यायपालिका के सदस्यों ने काफी तालियां बजाईं।

प्रधान न्यायाधीश ने उच्च न्यायालयों के कॉलेजियम से अनुरोध किया कि वे अपने विचार क्षेत्र का विस्तार करें और उच्चतम न्यायालय में वकालत कर रही अपने-अपने राज्यों की महिला अधिवक्ताओं को पदोन्नति के लिए शामिल करें।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा था कि यदि प्रगति को सार्थक बनाना है, तो उसे संस्थागत रूप देना होगा। उन्होंने कहा कि कहानी यह नहीं होनी चाहिए कि किसी एक व्यक्ति को अधिक प्रतिनिधित्व मिला, बल्कि यह होनी चाहिए कि उच्चतम न्यायालय और देश भर के उच्च न्यायालयों ने समझ-बूझकर निष्पक्षता को अपनी प्रक्रियाओं में समाहित किया।

उन्होंने कहा, “हम सभी को यह समझना चाहिए कि इस प्रकार का सुधार कोई आकस्मिक घटना नहीं है; यह एक सतत प्रक्रिया है। संस्थागत निष्पक्षता को बढ़ावा देने के लिए व्यक्तिगत कार्यकाल और व्यक्तिगत व्यक्तित्व से परे दृढ़ता की आवश्यकता होती है। यह मेरे कार्यकाल में, या मेरे साथी न्यायाधीशों के कार्यकाल में पूरी तरह से साकार नहीं हो सकता है। हालांकि, यह हमारी प्रतिबद्धता की गहराई को निर्धारित नहीं कर सकता और न ही करना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि सुधार का एक क्षेत्र उच्च न्यायालयों के कॉलेजियम के भीतर निहित है और उन्हें यह समझना होगा कि सोच-समझकर कार्रवाई करने का समय भविष्य में नहीं, बल्कि अभी है।

‘इंडियन वीमेन इन लॉ’ नामक संगठन से जुड़ी वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता और महालक्ष्मी पावनी ने अतिथियों का स्वागत किया। अतिथियों में पूर्व प्रधान न्यायाधीश एन.वी. रमण और उच्चतम न्यायालय के अन्य सेवारत न्यायाधीश शामिल थे, जिनमें न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और उज्ज्ल भुइयां भी शामिल थे।

भाषा

प्रशांत दिलीप

दिलीप


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