भूख हड़ताल पर बैठे झारखंड के चार छात्र प्रदर्शनकारियों की स्वास्थ्य स्थिति स्थिर: अधिकारी

भूख हड़ताल पर बैठे झारखंड के चार छात्र प्रदर्शनकारियों की स्वास्थ्य स्थिति स्थिर: अधिकारी

भूख हड़ताल पर बैठे झारखंड के चार छात्र प्रदर्शनकारियों की स्वास्थ्य स्थिति स्थिर: अधिकारी
Modified Date: August 12, 2026 / 10:15 pm IST
Published Date: August 12, 2026 10:15 pm IST

रांची, 12 अगस्त (भाषा) झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ भूख हड़ताल कर रहे चार छात्र प्रदर्शनकारियों की स्वास्थ्य स्थिति स्थिर है और उनका यहां सदर अस्पताल में इलाज किया जा रहा है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

‘जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच’ के एक कोर कमेटी सदस्य ने बताया कि भूख हड़ताल कर रहे दो प्रदर्शनकारियों-हबीबा और राहुल क्रांति का सदर अस्पताल में इलाज किया जा रहा है। हबीबा को मंगलवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जबकि क्रांति को सात अगस्त को अस्पताल ले जाया गया था।

भूख हड़ताल पर बैठे और उसी अस्पताल में इलाज करा रहे दो अन्य प्रदर्शनकारी देवेंद्र नाथ महतो और महेंद्र प्रताप ‘जेएसएससी-छात्र मंच’ के बैनर तले विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।

सदर अस्पताल के उपाधीक्षक ने कहा, ‘‘चारों छात्रों की स्वास्थ्य स्थिति स्थिर है। समय-समय पर उनकी जांच की जा रही है और उनके स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की जा रही है।’’

उन्होंने कहा कि महतो अब भी भूख हड़ताल पर हैं, लेकिन उनकी स्वास्थ्य स्थिति स्थिर है, जबकि क्रांति तरल पदार्थ ले रहे हैं।

महतो भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में पिछले 11 दिन से भूख हड़ताल पर हैं।

झारखंड विधानसभा तक छात्रों के मार्च में शामिल होने के बाद स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें सोमवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

क्रांति ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि चिकित्सकों की सलाह के बाद उन्होंने फलों का जूस और दूध समेत तरल आहार लेना शुरू कर दिया था।

उन्होंने कहा कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।

पलामू जिले के निवासी क्रांति ने चार अगस्त को जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में भूख हड़ताल शुरू की थी और स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें सात अगस्त को अस्पताल ले जाया गया था।

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने बुधवार को संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने अस्पताल जाकर वहां इलाज करा रहे प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की।

उन्होंने कहा कि मंगलवार शाम स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद दो और प्रदर्शनकारियों को अस्पताल ले जाया गया।

अंसारी ने कहा, ‘‘मैं छात्रों से अपील करता हूं कि वे भूख हड़ताल पर बैठकर अपनी जान जोखिम में न डालें। सरकार ने पहले ही एक टीम गठित कर दी है, बातचीत हो चुकी है और आगे भी बातचीत की जाएगी।’’

अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) अमरेंद्र प्रसाद ने कहा कि चार छात्रों का इलाज किया जा रहा है और उनकी हालत स्थिर है।

इस बीच, कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि उन्होंने अस्पताल जाकर छात्रों से मुलाकात की।

तिर्की ने कहा, ‘‘मैंने चार छात्रों में से तीन से मुलाकात की और उन्हें खाना खाने के लिए समझाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। ये सभी पूरी तरह वास्तविक छात्र हैं, जो पिछले 10 दिन से विरोध-प्रदर्शन और भूख हड़ताल कर रहे हैं। मैंने उनसे बात की और उनकी चिंताओं को दूर करने की कोशिश की। मैं उनकी स्थिति के बारे में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जानकारी दूंगी।’’

तिर्की ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘इन छात्रों से मिलने के बाद मुझे बहुत दुख हुआ। उन्हें सचमुच उम्मीद थी कि सरकार की ओर से कोई आएगा और उनसे संपर्क करेगा। लेकिन सरकार की ओर से गठित समिति से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में इन छात्रों को शामिल नहीं किया गया था, जो काफी हैरान करने वाली बात है।’’

बोकारो जिले की प्रदर्शनकारी हबीबा ने कहा, ‘‘जब तक हमारी समस्याओं का समाधान नहीं हो जाता, मैं भूख हड़ताल पर रहूंगी। जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के 135 सवालों में से 120 सवाल लीक हो गए थे और हम पिछले तीन महीने से भी अधिक समय से इस मुद्दे को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।’”

उन्होंने मंत्री के समक्ष दावा किया, ‘‘हमारे साथ धोखा हुआ है। हमने पैसे इकट्ठे किए और उच्च न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय दोनों में अपील की, लेकिन हम मुकदमा हार गए, क्योंकि सीआईडी (अपराध जांच विभाग) ने अदालत में गलत रिपोर्ट पेश की, जिसके कारण हमें हार का सामना करना पड़ा।’’

भाषा

देवेंद्र पारुल

पारुल


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