छात्रों पर बलप्रयोग को लेकर संसदीय समिति की बैठक में तीखी नोकझोंक

छात्रों पर बलप्रयोग को लेकर संसदीय समिति की बैठक में तीखी नोकझोंक

छात्रों पर बलप्रयोग को लेकर संसदीय समिति की बैठक में तीखी नोकझोंक
Modified Date: August 25, 2026 / 07:51 pm IST
Published Date: August 25, 2026 7:51 pm IST

नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) संसद की एक समिति की बैठक में मंगलवार को प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग किए जाने के मुद्दे पर सत्तापक्ष एवं विपक्षी सदस्यों के बीच उस वक्त तीखी बहस हुई, जब विपक्षी सदस्यों ने इस मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की।

प्रदर्शनकारी छात्रों पर बल प्रयोग का मुद्दा गृह मामलों संबंधी विभाग से जुड़ी संसद की स्थायी समिति की बैठक में उठा। बैठक में ‘‘बच्चों के खिलाफ अपराध’’ विषय पर विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारियों के विचार सुने जाने थे।

सूत्रों ने बताया कि बैठक की शुरुआत में कांग्रेस सदस्य अजय माकन ने प्रदर्शनकारी बच्चों के खिलाफ बल प्रयोग के मुद्दे को चर्चा के लिए उठाने की मांग की, लेकिन समिति के अध्यक्ष राधा मोहन दास अग्रवाल ने इसकी अनुमति नहीं दी।

विपक्ष की मांग को खारिज करते हुए अध्यक्ष ने कहा कि बैठक के पूर्व निर्धारित एजेंडे पर ही चर्चा की जानी चाहिए और विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारियों के विचार सुने जाने चाहिए।

बैठक में विपक्ष के अन्य सदस्यों ने भी माकन का समर्थन किया और कहा कि यह मामला ‘‘बच्चों के खिलाफ अपराध’’ की श्रेणी में आता है, इसलिए इस पर चर्चा होनी चाहिए।

माकन और अन्य सदस्यों ने प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर निकाले गए विरोध मार्च के दौरान प्रदर्शन कर रहे युवाओं के खिलाफ कथित तौर पर पैलेट गन, कील लगे डंडों और लाठियों के इस्तेमाल का मुद्दा उठाया।

सूत्रों के अनुसार, समिति के अध्यक्ष ने उनकी मांग नहीं मानी और कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा नहीं की जा सकती क्योंकि मामला विचाराधीन है तथा विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों को उच्चतम न्यायालय देख रहा है, जिसने इस संबंध में पहले ही एक समिति गठित कर दी है।

उन्होंने कहा कि विचाराधीन मामलों पर संसद की समितियों की बैठकों में चर्चा नहीं की जा सकती।

बैठक में करीब एक घंटे तक तीखी बहस जारी रही। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाद्रा और जय प्रकाश के अलावा शिवसेना (उबाठा) के संजय राउत, राजद के संजय यादव और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के हारिस बीरन समेत कई विपक्षी सदस्यों ने भी इस मामले पर चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने इसे बच्चों के खिलाफ अत्याचार करार दिया।

सूत्रों ने बताया कि माकन ने पांच अगस्त को हुई समिति की बैठक के दौरान अध्यक्ष को एक पत्र सौंपकर इस मुद्दे को उठाने की मांग की थी।

उन्होंने कहा था कि यह मामला बच्चों और उनके खिलाफ पैलेट गन, डंडों तथा लाठियों के इस्तेमाल से संबंधित है, जो उनके खिलाफ अपराध की श्रेणी में आते हैं।

सूत्रों के अनुसार, भाजपा सदस्य तरुण चुग और कांग्रेस के जय प्रकाश के बीच भी तीखी नोकझोंक हुई। चुग ने सिख विरोधी दंगों का मुद्दा उठाया, जिस पर कांग्रेस सदस्य ने भाजपा शासन में हरियाणा में कथित अत्याचारों का मुद्दा उठाकर पलटवार किया।

सूत्रों ने बताया कि जब माकन ने कहा कि प्रदर्शन कर रहे बच्चों के साथ पुलिस द्वारा कथित तौर पर कैसे अत्याचार किया जा सकता है, इस पर चर्चा होनी चाहिए, तब अध्यक्ष ने अपने फैसले में कहा कि समिति बाद में प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग के संबंध में मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) पर चर्चा करेगी।

अध्यक्ष के इस फैसले के बाद विपक्षी सदस्य भी सहमत हो गए और बैठक में तनाव कम हो गया।

समिति की बैठक में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधिकारियों को ‘‘बच्चों के खिलाफ अपराध’’ विषय पर उनके विचार रखने के लिए बुलाया गया था।

भाषा हक हक पवनेश

पवनेश


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