Allahabad High Court on E-Rickshaws: प्रदेश की राजधानी में बढ़ती ई-रिक्शा की संख्या पर हाईकोर्ट ने जताई चिंता, राज्य सरकार को लगाई फटकार
Allahabad High Court on E-Rickshaws: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने राजधानी में ई-रिक्शा की तेजी से बढ़ती संख्या पर चिंता जताई है।
Allahabad High Court on E-Rickshaws/Image Credit: X Handle
- इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने राजधानी में बढ़ती ई-रिक्शा की संख्या पर चिंता जताई है।
- उच्च न्यायालय की तरफ से कहा गया कि, इनकी संख्या शहर की यातायात व्यवस्था पर दबाव डाल रही है।
- उच्च न्यायालय की तरफ से इस मामले में राज्य सरकार को फटकार लगाई गई है।
Allahabad High Court on E-Rickshaws: लखनऊ: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने राज्य की राजधानी में ई-रिक्शा की तेजी से बढ़ती संख्या पर चिंता जताते हुए कहा कि जब इनकी संख्या शहर की यातायात व्यवस्था पर दबाव डाल रही है तो सरकार हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठ सकती। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की पीठ ने 21 अगस्त को लखनऊ में यातायात प्रबंधन से संबंधित सूरज सिंह विसेन की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान ये टिप्पणियां कीं। पीठ ने आदेश में कहा, ‘‘राज्य सरकार इस मुद्दे पर सोई नहीं रह सकती। उसे जागना होगा और एक सही नीति बनाकर इस समस्या से प्रभावी ढंग से निपटना होगा। यह एक गंभीर मुद्दा है, जिसे जल्द से जल्द हल करने की जरूरत है।’’
लखनऊ में चलते हैं 80 हजार ई-रिक्शा
अदालत को बताया गया कि लखनऊ में करीब 80 हजार ई-रिक्शा चल रहे हैं और इनके लिए पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने के कारण चौराहों और प्रमुख सड़कों के आसपास अक्सर यातायात बाधित होता है। पीठ ने कहा कि प्रत्येक सड़क की वाहनों को संभालने की एक निश्चित क्षमता होती है लेकिन लखनऊ में बड़ी संख्या में ई-रिक्शा चलने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। (Allahabad High Court on E-Rickshaws) अदालत ने अपर महाधिवक्ता को निर्देश दिया कि वह सरकार की प्रस्तावित नीति के संबंध में परिवहन विभाग के अपर मुख्य सचिव से स्पष्ट निर्देश प्राप्त करें। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार को यह बताना होगा कि ई-रिक्शा की लगातार बढ़ती बिक्री और संचालन को नियंत्रित करने के लिए वह क्या कदम उठाने की योजना बना रही है।
यातायात पुलिस का अलग कैडर बनाने मुद्दा भी उठा
Allahabad High Court on E-Rickshaws: सुनवाई के दौरान यातायात पुलिस का अलग कैडर बनाने का मुद्दा भी उठा। पीठ ने कहा कि यातायात प्रबंधन आम पुलिसकर्मियों के कार्यों से अलग है और सरकार को यातायात व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए यातायात पुलिस का अलग कैडर बनाने पर विचार करना चाहिए। अदालत ने अगली सुनवाई में विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया, जिसमें लखनऊ नगर निगम की रिपोर्ट और अदालत द्वारा गठित समिति के प्रस्ताव शामिल हों। मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को होगी।
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