Bilaspur High Court Latest Order: ‘दो शादीशुदा बेटियों को अनुकंपा नियुक्ति देने का आदेश’.. बिलासपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सिंगल बेंच के पुराने फैसले को किया रद्द

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शादीशुदा बेटियों को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित करने का बैंक का फैसला रद्द कर 90 दिन में नियुक्ति देने का आदेश दिया।

Bilaspur High Court Latest Order: ‘दो शादीशुदा बेटियों को अनुकंपा नियुक्ति देने का आदेश’.. बिलासपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सिंगल बेंच के पुराने फैसले को किया रद्द

Bilaspur High Court on Compassionate Appointment | Image- IBC24 NEWS File

Modified Date: August 25, 2026 / 09:58 pm IST
Published Date: August 25, 2026 9:58 pm IST
HIGHLIGHTS
  • शादीशुदा बेटी को नौकरी से नहीं कर सकते
  • वंचित हाईकोर्ट ने बैंक का आदेश किया रद्द
  • 90 दिन में नियुक्ति देने का निर्देश

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सिर्फ शादीशुदा होने के आधार पर बेटी को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। (Bilaspur High Court on Compassionate Appointment) हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने दो शादीशुदा बेटियों को बैंक में अनुकंपा नियुक्ति देने का आदेश दिया है।

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’90 दिनों के भीतर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी हो’ : छग HC

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के पुराने फैसले को रद्द करते हुए बैंक को निर्देश दिया कि दोनों महिलाओं की शैक्षणिक योग्यता और लागू नियमों के अनुसार 90 दिनों के भीतर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी की जाए।

विवाहित कहकर ख़ारिज किया आवेदन

मामला छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक के दो कर्मचारियों से जुड़ा है। कर्मचारी मदन कुमार पांडा और शैलेन्द्र कुमार जॉन्सन की सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उनकी शादीशुदा बेटियों अंकिता मिश्रा और शीना डेविड ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। (Bilaspur High Court on Compassionate Appointment) बैंक ने दोनों के आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिए कि वे विवाहित हैं। बैंक के फैसले के खिलाफ दोनों ने हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, सिंगल बेंच ने 7 मई 2026 को उनकी याचिकाएं खारिज कर दी थीं। इसके बाद दोनों ने डिवीजन बेंच में रिट अपील दायर की। डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि बैंक ने केवल बेटियों के विवाहित होने को आधार बनाकर उन्हें नियुक्ति से वंचित किया, जबकि इसी योजना में विवाहित बेटों को लाभ दिया जा रहा था। कोर्ट ने इसे समानता के अधिकार के खिलाफ माना।

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सिंगल बेंच के फैसले को भी किया रद्द

कोर्ट ने यह भी कहा कि शादी हो जाने मात्र से यह नहीं माना जा सकता कि बेटी की अपने माता-पिता पर आर्थिक या सामाजिक निर्भरता खत्म हो गई है। ऐसे मामलों में वास्तविक स्थिति और परिवार की निर्भरता का आकलन किया जाना जरूरी है। (Bilaspur High Court on Compassionate Appointment) हाईकोर्ट ने बैंक के दोनों रिजेक्शन आदेशों के साथ सिंगल बेंच के फैसले को भी रद्द कर दिया और दोनों अपीलकर्ताओं को नियमानुसार अनुकंपा नियुक्ति देने का आदेश दिया।

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