हिमंत ने कांग्रेस के ‘नुतुन बड़ो असम’ नारे की आलोचना की

हिमंत ने कांग्रेस के ‘नुतुन बड़ो असम’ नारे की आलोचना की

हिमंत ने कांग्रेस के ‘नुतुन बड़ो असम’ नारे की आलोचना की
Modified Date: January 31, 2026 / 08:44 pm IST
Published Date: January 31, 2026 8:44 pm IST

गुवाहाटी/खुमताई, 31 जनवरी (भाषा) असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने शनिवार को कांग्रेस के ‘नुतुन बड़ो असम’ नारे की आलोचना करते हुए पूछा कि क्या इसका आशय एक ऐसे असमिया समाज से है, जिसमें अवैध बांग्लादेशी प्रवासी शामिल हैं।

हिमंत ने विपक्षी दल से इस नारे की अवधारणा को स्पष्ट करने की मांग की।

कांग्रेस की असम इकाई के अध्यक्ष गौरव गोगोई राज्य में इस साल प्रस्तावित विधानसभा चुनावों से पहले समर्थन जुटाने के लिए ‘नुतुन बड़ो असम’ (नया महान असम) नारे का इस्तेमाल कर रहे हैं।

हिमंत ने गुवाहाटी में मे-डैम-मे-फी उत्सव से इतर संवाददाताओं से बातचीत में ‘मियां’ समुदाय को बांग्लादेशी घुसपैठिया बताते हुए कहा कि वह उनसे पूरी ताकत से लड़ेंगे, क्योंकि यह “असमिया लोगों के लिए जीवन और मृत्यु का मसला” है।

उन्होंने सवाल किया, “यह ‘नुतुन बड़ो असम’ क्या है? इसका क्या मतलब है?”

मे-डैम-मे-फी ‘ताई-अहोम’ समुदाय का एक धार्मिक उत्सव है, जिसमें देवी-देवताओं और पूर्वजों को प्रसाद चढ़ाया जाता है।

हिमंत ने कहा, “हमारे लिए, ‘बड़ो असम’ की स्थापना 600 साल पहले स्वर्गदेव चाओलुंग सिउ-का-फा (अहोम राजवंश के संस्थापक) ने की थी।”

उन्होंने कहा, “शायद, ‘नुतुन बड़ो असम’ की उनकी अवधारणा का मतलब अवैध बांग्लादेशियों को हमारे असमिया समाज में शामिल करना है।”

हिमंत ने कांग्रेस कार्यालय की दीवार पर बने एक भित्तिचित्र का जिक्र किया, जिस पर ‘नुतुन बड़ो असम’ का नारा लिखा हुआ है। उन्होंने कहा, “यह एक खतरनाक नारा है और ऐसा लगता है कि किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया है।”

गोलाघाट जिले के खुमताई में एक कार्यक्रम के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए हिमंत ने कहा, “हम चाओलुंग सिउ-का-फा के ‘बड़ो असम’ को समझते हैं। कभी-कभार कोई नये, विकसित असम की बात कर सकता है। लेकिन कांग्रेस ‘मियां’ लोगों (बांग्ला भाषी मुस्लिमों) को असमिया लोगों में शामिल करने की कोशिश कर रही है।”

उन्होंने दावा किया, “अगर भाजपा यहां नहीं होती, तो वे अपना ‘नुतुन असम’ बना लेते और उसे ‘मियां’ समुदाय को बेच देते। वे कहते हैं कि मैं ‘मियां’ समुदाय के खिलाफ बोलता हूं, लेकिन इन लोगों ने हमारे ‘सत्रों’ (वैष्णव शिक्षा संस्थानों) और जमीनों पर अतिक्रमण किया है, ‘लव जिहाद’ और ‘फर्टिलाइजर जिहाद’ किया है।”

हिमंत ने कांग्रेस पर असमिया लोगों को भुलाकर केवल ‘मियां’ समुदाय के बारे में सोचने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, “अगर कोई असमिया लोगों के खिलाफ कुछ कहता है, तो उन्हें (कांग्रेस नेताओं को) कोई आपत्ति नहीं होती। लेकिन अगर ‘मियां’ समुदाय के खिलाफ कुछ कहा जाता है, तो वे बहुत हंगामा करते हैं। ‘मियां’ समुदाय से मेरा तात्पर्य बांग्लादेशी घुसपैठियों से है।”

हिमंत ने दावा किया, “कांग्रेस और गौरव गोगोई ‘मियां’ समुदाय के वोटों के पीछे पागल हो गए हैं। लेकिन मैं उन्हें खदेड़ने के लिए हर संभव प्रयास करूंगा, क्योंकि यह असमिया लोगों के जीवन और मृत्यु का सवाल है।”

उन्होंने कहा, “असमिया लोगों ने इसे समझ लिया है और उन्हें इसके खिलाफ एकजुट होना होगा।”

‘मियां’ मूल रूप से असम में बांग्ला भाषी मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक अपमानजनक शब्द है। गैर-बांग्ला भाषी लोग इन लोगों को आमतौर पर बांग्लादेशी प्रवासी के रूप में पहचानते हैं।

भाषा पारुल पवनेश

पवनेश


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