हिमंत ने सीमा पर बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को जमीन सौंपने के फैसले का स्वागत किया

हिमंत ने सीमा पर बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को जमीन सौंपने के फैसले का स्वागत किया

हिमंत ने सीमा पर बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को जमीन सौंपने के फैसले का स्वागत किया
Modified Date: May 13, 2026 / 05:41 pm IST
Published Date: May 13, 2026 5:41 pm IST

(फोटो सहित)

गुवाहाटी, 13 मई (भाषा) असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को भूमि सौंपने के पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल के फैसले का बुधवार को स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह कदम राज्य और पूर्वोत्तर की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने अपने दूसरे कार्यकाल में मंत्रिमंडल की पहली बैठक की अध्यक्षता करने के बाद यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर कड़ी निगरानी और उसे बंद रखना असम और क्षेत्र की सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने दावा किया, ‘‘बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल के बीच बाड़ लगाने में भारी कमी के कारण घुसपैठ के खिलाफ हमारी लड़ाई हमेशा एक चुनौती बनी रही है।’’

शर्मा ने कहा कि असम में कई संगठन राज्य में सीमा को सील करने की मांग करते हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल में इसी तरह की सील के बिना यह मांग निरर्थक है।

उन्होंने कहा कि भारत-बांग्लादेश सीमा पांच राज्यों—मिज़ोरम, त्रिपुरा, मेघालय, असम और पश्चिम बंगाल—से लगती है, जिनमें असम की सीमा सबसे छोटी है जबकि पश्चिम बंगाल की सीमा पड़ोसी देश के साथ सबसे लंबी है।

शर्मा ने कहा, ‘‘यह लंबे समय से हमारा मुद्दा था, लेकिन सोमवार को पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण निर्णय लिया है कि 45 दिन के भीतर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को जमीन दी जाएगी ताकि भारत-बांग्लादेश सीमा को पूरी तरह से सुरक्षित किया जा सके और 800 किलोमीटर के क्षेत्र में बाड़ लगाई जा सके।’’

उन्होंने कहा कि यह असम के लोगों के लिए अत्यंत उत्साहजनक खबर है, क्योंकि “हम घुसपैठ के खिलाफ लड़ रहे हैं और इसे तब तक नहीं रोका जा सकता जब तक पश्चिम बंगाल में एक राष्ट्रवादी सरकार नहीं होती।”

शर्मा ने कहा, ‘‘मैं बंगाल मंत्रिमंडल, विशेष रूप से मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा लिए गए निर्णय का तहे दिल से स्वागत करता हूं।’’

शर्मा ने कहा कि बंगाल चुनाव के दौरान यही उनका मुख्य चुनावी मुद्दा था, क्योंकि जब तक उस राज्य की सीमा सुरक्षित नहीं होगी, तब तक पूरा पूर्वोत्तर क्षेत्र असुरक्षित बना रहेगा।

भाषा आशीष मनीषा

मनीषा


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