विश्वविद्यालयों में आरएसएस के कार्यक्रम कराना संवैधानिक नैतिकता के खिलाफ:एनएसयूआई अध्यक्ष

विश्वविद्यालयों में आरएसएस के कार्यक्रम कराना संवैधानिक नैतिकता के खिलाफ:एनएसयूआई अध्यक्ष

विश्वविद्यालयों में आरएसएस के कार्यक्रम कराना संवैधानिक नैतिकता के खिलाफ:एनएसयूआई अध्यक्ष
Modified Date: April 28, 2026 / 06:23 pm IST
Published Date: April 28, 2026 6:23 pm IST

नयी दिल्ली, 28 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस की छात्र इकाई भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने मंगलवार को कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यक्रम आयोजित कराया जाना संवैधानिक नैतिकता और लोकतांत्रिक भावना के खिलाफ है।

उन्होंने आरएसएस की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में जामिया मिलिया इस्लामिया में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर यह टिप्पणी की।

‘ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन’ (आइसा), ‘स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ और अन्य वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े 50 से अधिक छात्रों ने जामिया में आयोजित कार्यक्रम के विरोध में नारेबाजी की।

जाखड़ ने एक बयान में कहा, ‘‘जामिया मिलिया इस्लामिया केवल एक विश्वविद्यालय नहीं है, बल्कि यह भारत की बहुलतावादी परंपरा, संवैधानिक नैतिकता और लोकतांत्रिक भावना का प्रतीक है। इसके या किसी अन्य शिक्षण संस्थान के परिसर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े कार्यक्रमों का प्रवेश इस मूल भावना को प्रभावित करने का प्रयास है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह अस्वीकार्य है कि जहां छात्रों को अपनी आवाज उठाने पर दंडित किया जाता है, वहीं विभाजनकारी विचारधाराओं को बढ़ावा देने वाले संगठनों को खुली छूट दी जाती है। हम जामिया प्रशासन से तत्काल जवाबदेही की मांग करते हैं और यह स्पष्ट आश्वासन चाहते हैं कि भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों को परिसर के भीतर अनुमति नहीं दी जाएगी। ’’

भाषा हक हक नरेश

नरेश


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