अंतरिक्ष में ‘अग्निकुल’ का एआई डेटा सेंटर कैसे काम करेगा: सह-संस्थापक ने समझाया

अंतरिक्ष में ‘अग्निकुल’ का एआई डेटा सेंटर कैसे काम करेगा: सह-संस्थापक ने समझाया

अंतरिक्ष में ‘अग्निकुल’ का एआई डेटा सेंटर कैसे काम करेगा: सह-संस्थापक ने समझाया
Modified Date: March 3, 2026 / 03:55 pm IST
Published Date: March 3, 2026 3:55 pm IST

नयी दिल्ली, तीन मार्च (भाषा) चेन्नई आधारित ‘अग्निकुल कॉसमॉस’ इस साल के अंत तक एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) डेटा सेंटर का ‘प्रोटोटाइप’ पृथ्वी की कक्षा में भेजेगा, जिसका लक्ष्य 2027 तक इसे व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य बनाना है। अंतरिक्ष कंपनी के सह-संस्थापक श्रीनाथ रविचंद्रन ने यह जानकारी दी।

एआई डेटा सेंटर का उपयोग एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए किया जाता है और ये आकार में बहुत बड़े होते हैं।

कंपनी ने 12 फरवरी को यह घोषणा की कि ‘अग्निकुल कॉसमॉस’ जहां एआई डेटा सेंटर को प्रक्षेपित करेगा, वहीं इसे बेंगलुरु आधारित एआई सुपरक्लाउड मंच ‘नीवक्लाउड’ द्वारा विकसित किया जाएगा।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते उपयोग के साथ, संगृहीत और संसाधित किए जाने वाले डेटा की मात्रा में भारी वृद्धि हुई है।

वैश्विक प्रबंधन सलाहकार कंपनी मैकिन्से के अनुसार, डेटा सेंटर क्षमता की वैश्विक मांग 2023 से 2030 तक 19 प्रतिशत से 22 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ सकती है, जिससे यह 171 गीगावॉट से 219 गीगावॉट की वार्षिक मांग तक पहुंच सकती है।

चूंकि डेटा सेंटर बड़े होते हैं और उन्हें प्रशीतन के लिए भारी मात्रा में बिजली और पानी की आवश्यकता होती है, इसलिए कंपनियों को उन्हें बनाने के लिए जगह खोजने में कठिनाई हो रही है, यही कारण है कि स्पेसएक्स, गूगल, एक्सिओम और अन्य कंपनियां अंतरिक्ष में डेटा सेंटर स्थापित करने के तरीके खोजने की कोशिश कर रही हैं।

रविचंद्रन ने कहा, ‘‘अंतरिक्ष में असीमित सौर ऊर्जा उपलब्ध है, और शीतलन कहीं अधिक अनुकूल है क्योंकि आप पूर्ण शून्य के करीब तापमान के संपर्क में होते हैं… इसके अलावा, यह भौतिक रूप से अधिक सुरक्षित है क्योंकि कक्षा में डेटा सेंटर तक पहुंचना आसान नहीं है, जो डेटा को गोपनीय रखने में मदद करेगा।’’

अग्निकुल कॉसमॉस द्वारा प्रक्षेपित किया जाने वाल डेटा सेंटर एक स्वतंत्र उपग्रह नहीं होगा। इसके बजाय, निम्न पृथ्वी कक्षा में उपग्रहों (या विभिन्न रॉकेटों के ऊपरी चरणों) का एक समूह होगा, जिनमें से प्रत्येक में अलग-अलग डेटा सेंटर मॉड्यूल होंगे।

रविचंद्रन ने कहा, ‘‘यह प्रणाली ‘अंतर-उपग्रह’ और ‘उपग्रह से जमीनी संचार’ के माध्यम से काम करेगी।’’

ग्रहण के चरण के दौरान उपग्रह समूह को इस तरह से व्यवस्थित किया जाएगा कि वह भारी काम न करे – यह वह अवधि है जब यह पृथ्वी द्वारा डाली जाने वाली छाया से गुजरेगा, जिससे सीधी धूप अवरुद्ध हो जाएगी।

रविचंद्रन ने कहा, ‘‘डेटा संचारित करने जैसे कार्यों के लिए वे निम्न ऊर्जा प्रणाली में चलेंगे, और फिर सूर्य के सम्मुख होने के दौरान उच्च-ऊर्जा प्रणाली में बदल जाएंगे। तस्वीर खींचने वाले उपग्रहों के लिए यह ढांचा पहले से ही मौजूद है।

ये उपग्रह तापमान कम करने के लिए विकिरण शीतलन तकनीक का उपयोग करेंगे, जिस पर अग्निकुल कॉसमॉस ने व्यापक रूप से काम करने का दावा किया है। विकिरण शीतलन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा कोई वस्तु ऊष्मीय विकिरण के माध्यम से ऊष्मा खो देती है।

हालांकि, 2026 के अंत में प्रोटोटाइप का प्रक्षेपण डेटा सेंटर के व्यावसायीकरण का मार्ग प्रशस्त नहीं करेगा, लेकिन रविचंद्रन को उम्मीद है कि यह मिशन अंतरिक्ष में एआई डेटा सेंटर बनाने की उनकी कंपनी की क्षमता को प्रदर्शित करेगा।

रविचंद्रन ने कहा, ‘‘2027 से हम व्यावसायीकरण के चरण में होंगे, जिससे ग्राहकों का एक नया वर्ग तैयार होगा और हमारा बाजार काफी बढ़ जाएगा।’’

भाषा

नेत्रपाल नरेश

नरेश


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