मैंने एएमएमए इसलिए छोड़ा क्योंकि मुझे कठपुतली बनना मंजूर नहीं : श्वेता मेनन
मैंने एएमएमए इसलिए छोड़ा क्योंकि मुझे कठपुतली बनना मंजूर नहीं : श्वेता मेनन
कोच्चि, 24 जून (भाषा) अभिनेत्री श्वेता मेनन ने बुधवार को एएमएमए की अध्यक्ष पद से अपने इस्तीफे पर चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि उन्होंने अपने आत्मसम्मान को प्राथमिकता दी और पद इसलिए छोड़ा क्योंकि वह किसी की ‘कठपुतली’ बनने को तैयार नहीं थीं।
‘मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन’ (एएमएमए) की अध्यक्ष श्वेता मेनन और 17 सदस्यीय कार्यकारी समिति ने संगठन की वार्षिक आम सभा की बैठक के दौरान हुए नाटकीय घटनाक्रम और तीखी बहसों के बाद 21 जून को इस्तीफा दे दिया था।
ये इस्तीफे मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (एएमएमए) के भीतर पिछले कुछ महीनों में उभरे कई मुद्दों को लेकर जारी मतभेदों के बीच आए हैं।
‘फेसबुक’ पर साझा किए गए एक पोस्ट में श्वेता ने उनका समर्थन करने वालों का आभार व्यक्त किया और कहा कि वह सीधे जनता को अपनी बात बताना चाहती हैं। उन्होंने लिखा, ‘मेरे इस्तीफे का कारण यह है कि मैंने किसी की कठपुतली बनने से इनकार कर दिया।’
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एएमएमए के चुनाव से पहले ही कुछ लोगों का इस्तेमाल उनके खिलाफ प्रचार करने और मनगढ़ंत आरोप लगाने के लिए किया गया था। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद एएमएमए के अधिकतर सदस्यों के समर्थन से वह चुनाव जीतीं और अपनी क्षमता के अनुसार पूरी निष्ठा से काम किया।
पोस्ट के अनुसार, श्वेता ने दावा किया कि कुछ स्वार्थी तत्वों ने उनकी टीम को पूर्व समिति के कुछ सदस्यों द्वारा कथित रूप से किए गए गलत कार्यों की जांच करने से रोका।
उन्होंने अपनी समिति के कार्यकाल सहित पिछले दो कार्यकालों के खातों की विस्तृत जांच कराने की मांग की और पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए फोरेंसिक ऑडिट कराने की आवश्यकता पर जोर दिया।
अभिनेत्री ने आरोप लगाया कि उनके इस्तीफे के बाद भी उनके खिलाफ प्रचार, मनगढ़ंत आरोप और चरित्र हनन की कोशिशें जारी हैं।
अपनी राजनीतिक विचारधारा को लेकर लगाई जा रही अटकलों पर श्वेता ने लिखा, ‘मैं एक बात बिल्कुल स्पष्ट कर देना चाहती हूं। मैं न तो संघी हूं और न ही कम्युनिस्ट।’ उनका यह बयान क्रमशः संघ परिवार और वामपंथी दलों के संदर्भ में था।
उन्होंने कहा कि निमंत्रण मिलने के बावजूद उन्होंने कभी भी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार या वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) की पूर्व सरकार द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा नहीं लिया।
अपने इस्तीफे के फैसले की वजह बताते हुए उन्होंने कहा, ‘जब मुझे लगातार बेबुनियाद चरित्र हनन और व्यक्तिगत अपमान का सामना करना पड़ा, तब मैंने सिद्धांतों वाली एक महिला के रूप में एएमएमए से इस्तीफा देने का फैसला किया। यह निर्णय कमजोरी के कारण नहीं था, बल्कि आत्मसम्मान के कारण था।’
उन्होंने अपनी पोस्ट का समापन इन शब्दों के साथ किया, ‘जारी रहेगा… पिक्चर अभी बाकी है, मेरे दोस्त।’
भाषा तान्या मनीषा
मनीषा

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