आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ‘घोटाला’: सीबीआई ने हरियाणा के छह आईएएस अधिकारियों, 13 अन्य के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया

Ads

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ‘घोटाला’: सीबीआई ने हरियाणा के छह आईएएस अधिकारियों, 13 अन्य के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया

  •  
  • Publish Date - September 2, 2026 / 06:56 PM IST,
    Updated On - September 2, 2026 / 06:56 PM IST

नयी दिल्ली, दो सितंबर (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों और संगठनों के 504 करोड़ रुपये के कथित गबन के मामले में हरियाणा कैडर के छह आईएएस अधिकारियों, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के तीन अधिकारियों और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के एक अधिकारी समेत 19 आरोपियों के खिलाफ बुधवार को आरोपपत्र दाखिल किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि मामले में पंचकूला की विशेष अदालत के समक्ष दाखिल अपनी तीसरे आरोपपत्र में सीबीआई ने आईएएस अधिकारियों मोहम्मद शायिन, साकेत कुमार, प्रदीप कुमार, विनीत गर्ग, राम कुमार सिंह और पंकज अग्रवाल को आरोपी बनाया है।

उन्होंने बताया कि सीबीआई ने आरोपपत्र में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के अधिकारियों शमीम अहमद डार, सुधा गोयल और कुलदीप सिंह तथा एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के चरनजीत सिंह रंधावा को भी आरोपी बनाया है।

इसके अलावा हरियाणा सरकार के अन्य अधिकारियों दीप्ति कौशिक, राजेश गोयल, प्रिंस शर्मा, सौरव कुमार, प्रवीण कुमार, सुरेंद्र जैन, सुरिंदर कौर, अमित कुमार और जुगल किशोर को भी आरोपी बनाया गया है।

सीबीआई प्रवक्ता बीना यादव ने एक बयान में कहा कि आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, साक्ष्य नष्ट करने, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों को असली के रूप में इस्तेमाल करने, लेखा में हेराफेरी, आपराधिक विश्वासघात और उकसाने के आरोप तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिश्वतखोरी और आपराधिक कदाचार के अपराधों के आरोप लगाए गए हैं।

प्रवक्ता ने कहा, ‘‘जांच में सामने आया कि आरोपी सरकारी कर्मचारियों ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के आरोपी बैंक अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके सुनियोजित तरीके से धोखाधड़ी की योजना तैयार की और उसे अंजाम दिया।’’

एजेंसी ने कहा कि साजिश के तहत हरियाणा सरकार के आठ विभागों के धन को विभिन्न सूचीबद्ध बैंकों से आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक की उन विशिष्ट शाखाओं में स्थानांतरित किया गया, जहां आरोपी बैंक अधिकारी कार्यरत थे। उसने कहा कि इसके लिए इन शाखाओं में बैंक खाते खोले गए थे।

सीबीआई ने कहा, ‘‘इस प्रक्रिया में वित्तीय अनुशासन और धोखाधड़ी की रोकथाम से संबंधित हरियाणा सरकार के वित्त विभाग के दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया गया। इन खातों से धनराशि का धोखाधड़ी के जरिए गबन किया गया और उसे ऐसे तीसरे पक्षों को हस्तांतरित किया गया, जिनका सरकारी विभाग से कोई संबंध नहीं था।’’

सीबीआई ने आरोप लगाया कि इस तरह हस्तांतरित रकम को कई बैंक खातों के जरिए घुमाया गया और नकदी में बदला गया तथा आरोपियों ने इससे अवैध रूप से लाभ कमाया।

सीबीआई ने कहा, ‘‘इस घोटाले से राज्य सरकार के आठ विभाग और संगठन-पंचायत विभाग, पंचकूला और कालका नगर निगम, हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद, हरियाणा श्रम कल्याण बोर्ड, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और हरियाणा पावर जेनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड-प्रभावित हुए।’’

एजेंसी ने बताया कि धोखाधड़ी की कुल रकम 504 करोड़ रुपये है।

सीबीआई इस मामले में पहले ही 18 अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। इनमें दो बैंकों के अधिकारी, राज्य सरकार के कर्मचारी, निजी व्यक्ति और निजी कंपनियां शामिल हैं।

प्रवक्ता ने कहा, ‘‘वर्तमान आरोपपत्र दाखिल किए जाने के साथ इस मामले में अब तक जिन आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया है उनकी संख्या बढ़कर 37 हो गई है। सीबीआई ने इस मामले में 54 तलाशी अभियान चलाए हैं और करीब 20 करोड़ रुपये मूल्य का सोना समेत अन्य साक्ष्य जब्त किए हैं तथा अब तक 26 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।’’

सीबीआई ने कहा कि उसने चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) और नगर निगम चंडीगढ़ से संबंधित दो अन्य मामलों को भी अपने हाथ में लिया है। वहीं एक अन्य मामला चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (क्रेस्ट) से संबंधित है।

एजेंसी ने कहा, ‘‘इन दोनों मामलों में पहले ही आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। तीनों मामलों में अन्य संदिग्धों और आरोपियों के खिलाफ आगे की जांच जारी रहेगी।’’

भाषा अमित रंजन

रंजन

रंजन