बंगाल में सत्ता में आने पर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार दिवस बढ़ाकर 200 दिन करेंगे: शुभेंदु अधिकारी

बंगाल में सत्ता में आने पर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार दिवस बढ़ाकर 200 दिन करेंगे: शुभेंदु अधिकारी

बंगाल में सत्ता में आने पर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार दिवस बढ़ाकर 200 दिन करेंगे: शुभेंदु अधिकारी
Modified Date: January 2, 2026 / 08:13 pm IST
Published Date: January 2, 2026 8:13 pm IST

चंचल (पश्चिम बंगाल), दो जनवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि अगर आगामी विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सत्ता में आयी तो केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार 100 दिन की गारंटीकृत ग्रामीण रोजगार योजना को दोगुना करके 200 दिन कर देगी।

अधिकारी ने मालदा जिले के चंचल में एक जनसभा को संबोधित करते हुए, लोगों से अपने जॉब कार्ड को सुरक्षित रखने का आग्रह किया और दावा किया कि भाजपा ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का विस्तार उसके वर्तमान दायरे से आगे करेगी।

अधिकारी ने कहा, ‘‘अपने रोजगार कार्ड संभालकर रखें। भाजपा के सत्ता में आने के बाद, हम ग्रामीण रोजगार की 100 दिनों की गारंटी को दोगुना करके 200 दिन कर देंगे।’’

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दिसंबर 2025 में, भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने पूर्ववर्ती मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के स्थान पर नया ‘विकसित भारत- जी राम जी विधेयक’ पारित किया।

नये कानून में 100 दिनों के बजाय 125 दिनों के काम की गारंटी दी गई है, रोजगार को बुनियादी ढांचे के साथ एकीकृत किया गया है और 40 प्रतिशत वित्तपोषण की जिम्मेदारी राज्यों पर डाली गई। इससे संसद के अंदर और बाहर इसके प्रभाव और वित्तपोषण संरचना को लेकर व्यापक बहस छिड़ गई है।

अधिकारी ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस केंद्र सरकार पर झूठे आरोप लगा रही है कि उसने राज्य को आवास और मनरेगा योजनाओं के लिए धनराशि नहीं दी।

उन्होंने आरोप लगाया कि इनके लिए दी गई धनराशि को अनधिकृत लाभार्थियों द्वारा हड़प लिया गया। उन्होंने कहा, ‘‘यदि राज्य में भाजपा की सरकार बनेगी, तो लाभार्थियों के प्रत्येक मकान के लिए तीन लाख रुपये दिए जाएंगे।’’

उन्होंने कहा कि राज्य की आवास योजना के तहत घर बनाने के लिए ममता बनर्जी सरकार द्वारा निर्धारित 1.20 लाख रुपये बढ़ती सामग्री लागत के मद्देनजर पर्याप्त नहीं।

तृणमूल कांग्रेस सरकार पर उनके सभी कार्यक्रमों के सामने प्रशासनिक बाधाएं खड़ी करने का आरोप लगाते हुए, अधिकारी ने कहा कि उन्हें 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद से अपनी रैलियों और राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए अनुमति प्राप्त करने के लिए 104 बार कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख करना पड़ा। उन्होंने कहा कि उनमें चंचल में होने वाला वर्तमान कार्यक्रम भी शामिल है।

उन्होंने कहा, ‘‘क्यों? क्योंकि अत्याचारी टीएमसी सरकार और उनकी कठपुतली पुलिस बिना किसी ठोस कारण के अनुमतियां देने से इनकार करती रहती है, जिसका एकमात्र उद्देश्य विपक्षी आवाजों को दबाना और लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलना है।’’

उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘माननीय कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बार-बार इन मनमानी अस्वीकृतियों को खारिज करते हुए अनुमतियां प्रदान की हैं, जिससे ममता बनर्जी प्रशासन द्वारा सत्ता के घोर दुरुपयोग का पर्दाफाश हुआ है। यह शासन नहीं है; यह तो छद्मवेश में तानाशाही है।’’

अधिकारी ने कहा कि राज्य में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया से यह संकेत मिल रहा है कि चुनाव में क्या होने वाला है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में 2024 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच मतों का अंतर केवल 40 लाख का था। उन्होंने कहा, ‘‘जारी एसआईआर में प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में 58 लाख नाम पहले ही हटा दिए गए हैं।’’

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा इस सप्ताह की शुरुआत में कोलकाता दौरे के दौरान कहे गए शब्दों को दोहराते हुए, अधिकारी ने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस विपक्ष की भूमिका में रहेगी।’’

भाजपा नेता ने पश्चिम बंगाल को ‘बंगाली हिंदुओं की मातृभूमि’ घोषित किया और पिछले साल अक्टूबर में जलपाईगुड़ी में मालदा उत्तर भाजपा सांसद खागेन मुर्मू पर हुए हमले का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी राज्य की धरती पर इस तरह के रक्तपात को जारी नहीं रहने दे सकती।

उन्होंने कहा, ‘‘बदला चैले, बदल करूं (बदला लेने से पहले बदलाव लाओ)।’’ अधिकारी ने टीएमसी के 2011 के राज्य चुनाव के नारे ‘बदला नोय, बदल चाई (बदला नहीं, केवल बदलाव)’ में थोड़ा बदलाव किया, जिसमें टीएमसी ने बंगाल में वाम मोर्चा सरकार को सत्ता से हटा दिया था।

अधिकारी ने ‘परिवर्तन संकल्प सभा’ ​​शीर्षक से आयोजित सभा को संबोधित करते हुए, 2025 की शुरुआत में मुर्शिदाबाद में वक्फ संशोधन अधिनियम विरोधी हिंसा के दौरान हिंदुओं पर हुए हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि ‘वर्तमान समय की आवश्यकता’ राज्य भर में हिंदुओं को एकजुट करना है।

उन्होंने कहा, ‘‘2021 के चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल के दो क्षेत्रों में हिंदू एकजुट थे, मालदा उत्तर क्षेत्र में जहां भाजपा ने दो सीट जीतीं और नंदीग्राम में जहां मैंने मुख्यमंत्री को हराया। अब काम उन्हें पूरे राज्य में एकजुट करना है।’’

मुख्यमंत्री पर तीखा प्रहार करते हुए और बनर्जी के भतीजे और टीएमसी के कथित दूसरे नंबर के नेता अभिषेक बनर्जी के साथ तीखे मतभेदों के बीच 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल होने का उल्लेख करते हुए, अधिकारी ने कहा, ‘‘मैंने टीएमसी तब छोड़ी जब दीदी (बहन) पिशी (बुआ) बन गईं।’’

उन्होंने दावा किया, ‘मालदा के लोग टीएमसी से नफरत करते हैं क्योंकि वे (टीएमसी) चोर हैं। पिछले आम चुनाव में पार्टी को विधानसभा की किसी भी सीट पर बढ़त नहीं मिली।’’

अधिकारी ने वादा किया कि अगर भाजपा पश्चिम बंगाल में सत्ता में आती है तो वह लोगों के लिए बेहतर कल्याणकारी योजनाएं शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि टीएमसी यह झूठ फैला रही है कि महिलाओं को आर्थिक सहायता देने वाली योजना को भाजपा द्वारा बंद कर दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के नेताओं के विरोध के बावजूद राज्य में वक्फ (संशोधन) अधिनियम लागू कर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि भाजपा राज्य में शांति चाहती है, जबकि तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व मतों के लिए विभाजनकारी राजनीति और मुसलमानों के तुष्टिकरण में लिप्त है। उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा पश्चिम बंगाल में गुजरात जैसे उद्योग और उत्तर प्रदेश और बिहार जैसी सुशासन व्यवस्था लागू करने की बात करती है।’’

राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मकर संक्रांति के बाद मध्य जनवरी में मालदा का दौरा कर सकते हैं।

भाषा अमित माधव

माधव


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