पति साथ न रहने की परिस्थितियां बनाए तो पत्नी गुजारा-भत्ते का दावा कर सकती हैः हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

पति साथ न रहने की परिस्थितियां बनाए तो पत्नी गुजारा-भत्ते का दावा कर सकती हैः Important comment of Delhi High Court regarding maintenance

पति साथ न रहने की परिस्थितियां बनाए तो पत्नी गुजारा-भत्ते का दावा कर सकती हैः हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
Modified Date: November 29, 2022 / 08:15 pm IST
Published Date: September 27, 2022 9:31 pm IST

नयी दिल्ली : Important comment of Delhi High Court दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि यदि पति ने ऐसी परिस्थितियां पैदा कर दी हैं कि पत्नी उसके साथ रह ही नहीं सकती तो पत्नी को अपने पति के साथ वैवाहिक संबंध बहाल करने संबंधी न्यायिक आदेश उसे (पत्नी को) आपराधिक कानून के तहत भरण-पोषण का दावा करने से वंचित नहीं करता ।

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Important comment of Delhi High Court अदालत ने कहा कि न्यायाधीशों को निश्चित परिस्थितियों में पत्नियों के भरण-पोषण से संबंधित दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 125 के पीछे के उद्देश्य को भी ध्यान में रखना चाहिए। अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि भरण-पोषण से संबंधित हर मामले से एक ही तरीके से नहीं निपटा जाना चाहिए, साथ ही संबंधित अदालतों को ‘संवेदनशील और सतर्क’ होना चाहिए।

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उच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी निचली अदालत के एक आदेश के खिलाफ एक महिला की याचिका पर की। निचली अदालत ने कहा था कि याचिकाकर्ता सीआरपीसी की धारा 125 के तहत गुजारा-भत्ते का दावा करने की हकदार नहीं है, क्योंकि उसके खिलाफ वैवाहिक अधिकारों की बहाली का एक पक्षीय आदेश दिया गया था।

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न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि इस फैसले में निचली अदालत का तर्क ‘त्रुटिपूर्ण’ था। उन्होंने कहा कि दाम्पत्य अधिकारों की बहाली के लिए एक पक्षीय आदेश के मद्देनजर आपराधिक कानून के तहत गुजारा भत्ता देने पर विचार करने के लिए कोई पूर्ण रोक नहीं है और यदि संबंधित अदालत इस बात को लेकर संतुष्ट है कि ऐसी परिस्थितियां मौजूद हैं कि पत्नी के पास पति से दूर रहने का उचित आधार है, तो गुजारा भत्ता दिया जा सकता है। न्यायाधीश ने कहा, ‘‘यदि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य से पता चलता है कि पति के आचरण के कारण पत्नी उसके साथ रहने में सक्षम नहीं है और पति ने पत्नी और नाबालिग बच्चों की परवरिश से इनकार कर दिया है, तो पत्नी को गुजारा-भत्ते से इनकार नहीं किया जा सकता।’’

 


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सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।