असम और बंगाल में भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने सुरक्षित सीटों पर शानदार जीत दर्ज की
असम और बंगाल में भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने सुरक्षित सीटों पर शानदार जीत दर्ज की
नयी दिल्ली, छह मई (भाषा) असम और पश्चिम बंगाल में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके सहयोगी दलों ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) के लिए आरक्षित सीटों पर शानदार जीत हासिल की है। तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सहयोगी दलों ने बढ़िया प्रदर्शन किया है।
असम में भाजपा और उसके सहयोगियों के प्रदर्शन से आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों में मजबूत एकजुटता झलकती है। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित नौ निर्वाचन क्षेत्रों में से भाजपा ने पांच सीटें और राजग के सहयोगी दल असम गण परिषद (एजीपी) ने तीन सीटें जीतीं जबकि कांग्रेस को सिर्फ एक सीट मिली।
असम में अनुसूचित जनजाति के लिए 18 सीट आरक्षित हैं और ये सभी राजग के खाते में गईं। भाजपा ने 13 और राजग के सहयोगी दल बीपीएफ ने पांच सीटें जीतीं। एक सामान्य सीट पर राजग के एक अन्य सहयोगी दल एजीपी के आदिवासी उम्मीदवार ने जीत दर्ज की।
सूत्रों के अनुसार, ये परिणाम भाजपा के नेतृत्व वाले राजग की तरफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के मतदाताओं की स्पष्ट एकजुटता को दर्शाते हैं, जिससे आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र एक निर्णायक चुनावी स्तंभ बन गए हैं।
उन्होंने बताया कि निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन ने एक संरचनात्मक भूमिका निभाई, जिससे स्वदेशी और आदिवासी लोगों के लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या 16 से बढ़कर 19 हो गई और अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या आठ से बढ़कर नौ हो गई।
सूत्रों के अनुसार, बीपीएफ जैसे सहयोगी दलों के माध्यम से मजबूत आदिवासी लामबंदी, साथ ही ऊपरी असम और पहाड़ी क्षेत्रों में भाजपा के विस्तार ने राजग के लिए अनुसूचित जनजाति सीटों पर लगभग पूर्ण नियंत्रण सुनिश्चित किया।
पश्चिम बंगाल में वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव परिणामों ने आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों में निर्णायक राजनीतिक समीकरणों को प्रदर्शित किया।
सूत्रों के अनुसार, अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित 68 निर्वाचन क्षेत्रों में से भाजपा ने 51 (अनुसूचित जाति की 75 प्रतिशत सीटें) जीतीं, जबकि टीएमसी को केवल 17 सीटें मिलीं। यह भाजपा के प्रति दलितों के समर्थन में मजबूती का संकेत है।
अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों पर स्थिति में बदलाव और अधिक तीव्र है। भाजपा ने अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सभी 16 सीटों पर जीत हासिल की, जो उत्तर बंगाल और जंगलमहल जैसे आदिवासी क्षेत्रों में एकसमान जनादेश को दर्शाती है।
कुल मिलाकर, भाजपा ने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित कुल 84 सीटों में से 67 पर जीत हासिल की जबकि टीएमसी केवल 17 सीट पर सिमटकर रह गई और अन्य सभी दलों का सफाया हो गया। यह उन क्षेत्रों में भाजपा के जबरदस्त दबदबे को दर्शाता है जिन्हें कभी बंटा हुआ माना जाता था।
सूत्रों के अनुसार, मतुआ समुदाय के एकजुट होकर भाजपा की ओर रुख करने से अनुसूचित जाति बहुल सीटों, विशेषकर सीमावर्ती क्षेत्रों में, भाजपा के प्रदर्शन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
तमिलनाडु में राजग की सहयोगी अन्नाद्रमुक ने अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित 46 सीटों में से नौ और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित दो सीटों में से एक पर जीत हासिल की। पुडुचेरी में राजग की सहयोगी एआईएनआरसी ने अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित पांच सीटों में से दो पर जीत दर्ज की।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सोमवार को 206 सीटें जीतकर दो-तिहाई से अधिक बहुमत प्राप्त कर इतिहास रच दिया और टीएमसी के 15 साल के शासन का अंत कर दिया।
पुडुचेरी में अखिल भारतीय एनआर कांग्रेस ने 16 सीट पर लड़कर 12 सीटों पर जीत हासिल की है और भाजपा ने 10 सीट पर लड़कर चार सीटों पर जीत दर्ज की है। राजग के अन्य घटक दल, अन्नाद्रमुक और लाचिया जननायगा काची (एलजेके) ने एक-एक सीट पर जीत हासिल की है और गठबंधन के पास 30 सदस्यीय विधानसभा में 18 सीटें हैं, जो सरकार बनाने के लिए आवश्यक 16 सीट के जादुई आंकड़े से दो अधिक हैं।
भाषा संतोष नरेश
नरेश

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