पिथौरागढ़ के गांव में एसएसबी जवानों ने वृद्धा की अर्थी को कंधा दिया
पिथौरागढ़ के गांव में एसएसबी जवानों ने वृद्धा की अर्थी को कंधा दिया
पिथौरागढ़, दो जनवरी (भाषा) उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में पलायन की मार झेल रहे तड़ीगांव में कोई युवा पुरूष नहीं होने के कारण एक वृद्वा की अर्थी को शमशान घाट तक पहुंचाने के लिए सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवान मदद के लिए आगे आए।
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित इस गांव में रहने वाली झूपा देवी (100) का बुधवार को निधन हो गया। उनकी पार्थिव शरीर को तीन किलोमीटर दूर काली नदी के किनारे स्थित शमशान घाट तक पहुंचाना था जिसके लिए गांव में कोई युवा पुरूष उपलब्ध नहीं था।
गांव के एक बुजुर्ग भूपेंद्र चंद ने कहा, ‘‘गांव में कोई युवा पुरूष नहीं था और इसलिए झूपा देवी के शव को शमशान घाट तक पहुंचाने में हमें एसएसबी जवानों की सहायता लेनी पड़ी।’’
झूपा देवी के 65 वर्षीय पुत्र रमेश चंद ने बताया कि ग्रामीणों के अनुरोध पर इस काम के लिए तड़ीगांव के पास स्थित एसएसबी की सीमा चौकी से दो अधिकारी और चार जवान भेजे गए ।
उन्होंने कहा कि एसएसबी जवानों ने न केवल वृद्धा की पार्थिव शरीर घर से शमशान घाट तक पहुंचाई बल्कि वे दाह संस्कार के लिए लकड़ियां भी ढोकर ले गए और अंतिम संस्कार पूरा करने में भी मदद की ।
रमेश चंद ने कहा कि उनके गांव में इस समय केवल चार बुजुर्ग पुरूष ही रह रहे हैं जबकि युवा पुरूष आजीविका कमाने के लिए शहरों की ओर चले गए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘गांव पलायन से बुरी तरह प्रभावित है क्योंकि गांव में आजीविका कमाने का कोई साधन नहीं है और लगभग सभी युवा पुरूष यहां से बाहर चले गए हैं।’’
रमेश चंद ने कहा कि 20 साल पहले गांव में 37 परिवार थे जो अब घटकर केवल 13 रह गए हैं । उन्होंने बताया कि गांव में केवल 50 लोग रहते हैं जिनमें चार बुजुर्ग आदमियों के अलावा महिलाएं और बच्चे हैं।
भूपेंद्र चंद ने कहा,‘‘गांव तक पक्की सड़क भी नहीं है, इसके अलावा जंगली जानवरों की भी समस्या है जो हमारी फसल, फलों के पेड़ और सब्जियां बर्बाद कर देते हैं।’’
उन्होंने बताया कि 2019 में ग्रामीणों ने कच्ची सड़क बनायी थी लेकिन वह भी अब तक पक्की नहीं हो पायी है और इस कारण गांव तक वाहन भी नहीं पहुंच पाते ।
उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में युवा गांव से चले गए हैं ।
भाषा सं दीप्ति राजकुमार
राजकुमार

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