‘इंडिया’ गठबंधन : नेताओं ने बड़ा दिल दिखाने और एकजुट होकर भाजपा को चुनौती देने का सुझाव दिया

‘इंडिया’ गठबंधन : नेताओं ने बड़ा दिल दिखाने और एकजुट होकर भाजपा को चुनौती देने का सुझाव दिया

‘इंडिया’ गठबंधन : नेताओं ने बड़ा दिल दिखाने और एकजुट होकर भाजपा को चुनौती देने का सुझाव दिया
Modified Date: June 8, 2026 / 08:04 pm IST
Published Date: June 8, 2026 8:04 pm IST

नयी दिल्ली, आठ जून (भाषा) विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की बैठक में शामिल कई नेताओं ने पुराने गिले-शिकवे भूलकर, बड़ा दिल दिखाते हुए और एकजुट होकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तथा मोदी सरकार को चुनौती देने का सुझाव दिया।

सूत्रों ने बताया कि तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने इस बात की जोरदार पैरवी की कि गठबंधन में शामिल दलों को एक दूसरे की आलोचना करने से बचना चाहिए। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद इस गठबंधन को लेकर उनके रुख में बड़ा बदलाव आया है।

बैठक में ममता और कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी के बीच गर्मजोशी भरी मुलाकात भी हुई।

सूत्रों ने बताया कि बैठक औपचारिक रूप से शुरू होने से पहले ममता ने सोनिया गांधी से करीब 10 मिनट लंबी बातचीत की।

कांग्रेस ने दोनों नेताओं की एक-दूसरे को गले लगाते हुए तस्वीर भी अपने सोशल मीडिया मंच पर साझा की।

सूत्रों के अनुसार, बैठक में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने तर्क दिया कि यदि विपक्षी दलों को भाजपा और मोदी सरकार को सफलतापूर्वक चुनौती देनी है तो उनके बीच आपसी विश्वास और एकजुटता आवश्यक होगी।

बैठक में शामिल एक नेता ने बताया, ‘‘राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस और ‘इंडिया’ के अन्य घटक एक तरफ हैं और दूसरी तरफ भाजपा-आरएसएस है। उन्होंने नागरिक समाज आंदोलनों के साथ अधिक जुड़ाव का भी आह्वान किया और आवश्यकता पड़ने पर गठबंधन के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने में योगदान देने की इच्छा का संकेत दिया।’’

राहुल गांधी के बगल में बैठे समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी गठबंधन के भीतर किसी तरह की कड़वाहट नहीं होने की आवश्यकता पर जोर दिया।

सूत्रों के अनुसार, यादव ने कहा कि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को ‘‘बड़ा दिल दिखाना चाहिए’’ और अलग-अलग राज्यों में भाजपा के विरुद्ध खड़े सबसे मजबूत दल का समर्थन करना चाहिए।

पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने तर्क दिया कि जो लोग मानते हैं कि ममता बनर्जी हार गई हैं, वे गलत हैं, बल्कि सच यह है कि संस्थागत कारणों ने इस परिणाम में भूमिका निभाई।

लगभग ढाई घंटे चली बैठक में शामिल एक सांसद ने बताया, ‘‘ममता बनर्जी ने कहा कि उन्हें 90 फीसदी यकीन है कि उनका जनादेश लूट लिया गया है। अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव ने कहा कि वे 40 फीसदी आश्वस्त हैं। राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें 100 फीसदी यकीन है कि हाल के चुनावों में जनादेश चोरी हुआ है।’’

राजद नेता तेजस्वी यादव ने तर्क दिया कि विपक्ष को तत्काल चुनावी मुकाबलों से आगे बढ़कर 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए व्यवस्थित रूप से तैयारी शुरू करने की जरूरत है।

सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने कहा कि गठबंधन को जमीन पर सक्रिय रहना चाहिए और भाजपा के खिलाफ निरंतर अभियान चलाना चाहिए।

बैठक में वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से शामिल हुए शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने गठबंधन सहयोगियों के बीच निरंतर बैठकों का प्रस्ताव रखा और तर्क दिया कि हाल के चुनावों से मुख्य सबक यह है कि बेहतर समन्वय की जरूरत है।

भाषा हक हक सुरेश

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