भारत, ऑस्ट्रेलिया को एक-दूसरे की कहानियां सुनने की जरूरत: ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन
भारत, ऑस्ट्रेलिया को एक-दूसरे की कहानियां सुनने की जरूरत: ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन
(तस्वीर सहित)
नयी दिल्ली, 14 फरवरी (भाषा) भारत में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ने भारत और ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था को “काफी हद तक एक-दूसरे की पूरक” करार देते हुए कहा कि दोनों देश ऐसी चीजों का उत्पादन करते हैं, जो एक-दूसरे के हितों के अनुकूल हैं, लेकिन द्विपक्षीय संबंध इस पहलू से कहीं अधिक गहरे होने चाहिए।
ग्रीन ने यहां ऑस्ट्रेलियाई उच्चायोग परिसर में शुक्रवार रात आयोजित ‘गिग ऑन द ग्रीन’ कार्यक्रम से इतर ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा, “हमें एक-दूसरे को और अधिक गहराई से समझने की जरूरत है। हमें एक-दूसरे की कहानियां जानने और सुनने की जरूरत है।”
कार्यक्रम में भारत में जन्मे रूबेन डी मेलो सहित भारतीय मूल के दो ऑस्ट्रेलियाई गायकों ने प्रस्तुति दी। रूबेन ने 2024 में ‘द वॉइस ऑस्ट्रेलिया’ गायन प्रतियोगिता जीती थी।
ग्रीन ने कहा, “यह हमारे लिए एक बहुत ही खास अवसर है। आप जानते हैं, हम रक्षा और सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में बहुआयामी द्विपक्षीय संबंध स्थापित कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि हमारे बीच जो मानवीय जुड़ाव है, वह द्विपक्षीय संबंधों की एक बहुत ही खास बात है।
ग्रीन ने कहा, “ऑस्ट्रेलिया में वर्तमान में भारतीय मूल के दस लाख से अधिक लोग हैं। यह हमारे देश में सबसे तेजी से बढ़ने वाला समुदाय है और वे हमारे समाज में शानदार योगदान दे रहे हैं। हम चाहते हैं कि वे द्विपक्षीय संबंधों के लिए भी शानदार काम करें।”
ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त ने कहा कि आर्थिक, रक्षा और अन्य साझेदारियों के अलावा, संस्कृति भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।
उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच कुछ चीजें “हमेशा अच्छी रहेंगी” और “हम अपने क्षेत्र में रणनीतिक साझेदार हैं।”
ग्रीन ने कहा, “हमारी अर्थव्यवस्थाएं काफी हद तक एक-दूसरे की पूरक हैं, जिसका मतलब यह है कि हम एक-दूसरे के हितों के अनुरूप उत्पादों का उत्पादन करते हैं। लेकिन हमें इससे भी गहरे संबंधों की आवश्यकता है। हमें एक-दूसरे को गहराई से समझने की जरूरत है। हमें एक-दूसरे की कहानियां जानने और सुनने की जरूरत है।”
उन्होंने कहा कि ‘गिग ऑन द ग्रीन’ उन कई तरीकों में से एक है, जिनके जरिये “हम ऑस्ट्रेलिया की सर्वश्रेष्ठ संस्कृति और कला को भारत में लाने की कोशिश कर रहे हैं, ठीक उसी तरह जैसे हम भारत की संस्कृति और कला का ऑस्ट्रेलिया में स्वागत कर रहे हैं।”
भाषा पारुल संतोष
संतोष

Facebook


