ब्रिक्स घोषणापत्र पर आम सहमति बनाने के लिए सदस्य देशों के साथ खुलकर चर्चा कर रहा भारत

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ब्रिक्स घोषणापत्र पर आम सहमति बनाने के लिए सदस्य देशों के साथ खुलकर चर्चा कर रहा भारत

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  • Publish Date - August 27, 2026 / 07:27 PM IST,
    Updated On - August 27, 2026 / 07:27 PM IST

नयी दिल्ली, 27 अगस्त (भाषा) भारत नयी दिल्ली में आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सर्वसम्मति से घोषणापत्र जारी करने के लिए समूह के सदस्य देशों के साथ ‘‘खुलकर’’ चर्चा कर रहा है और इसमें पश्चिम एशिया में संघर्ष का संवाद एवं कूटनीति के जरिए समाधान निकालने तथा समुद्री व्यापार का निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करने जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। आधिकारिक सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

इस प्रभावशाली समूह के मौजूदा अध्यक्ष के रूप में भारत 12 और 13 सितंबर को नयी दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा।

चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन उन शीर्ष नेताओं में शामिल हैं जिनके शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने की उम्मीद है।

सूत्रों ने बताया कि इस चर्चा में क्षेत्रीय अखंडता सुनिश्चित करने, समुद्री व्यापार के निर्बाध आवागमन, आम नागरिकों एवं असैन्य बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और संवाद एवं कूटनीति के जरिए संघर्ष का समाधान निकालने पर जोर दिया जा रहा है।

ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी किए जाने के बाद वैश्विक तेल आपूर्ति गंभीर रूप से बाधित हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया में ऊर्जा आपूर्ति की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है और वैश्विक पेट्रोलियम आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।

मई में ब्रिक्स सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक बिना किसी संयुक्त बयान के समाप्त हो गई थी। पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच गहरे मतभेद बैठक के दौरान खुलकर सामने आए थे।

ब्रिक्स सर्वसम्मति के सिद्धांत पर काम करता है। विदेश मंत्रियों की बैठक के अंत में भारत ने अध्यक्ष का वक्तव्य और परिणाम दस्तावेज जारी किया था, जिसमें दो विशिष्ट अनुच्छेद ऐसे थे जिन पर सर्वसम्मति नहीं बन सकी थी।

यह पूछे जाने पर कि क्या नयी दिल्ली में होने वाले समूह के शिखर सम्मेलन में कोई घोषणापत्र जारी हो पाएगा, सूत्रों ने कहा, ‘‘हम सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर आम सहमति बनाने के लिए ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ खुलकर बातचीत कर रहे हैं।’’

ब्रिक्स में मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। इसका 2024 में विस्तार कर मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब को इसमें शामिल किया गया तथा 2025 में इंडोनेशिया इसका सदस्य बना। बेलारूस, बोलिविया, कजाखस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम पिछले वर्ष ब्रिक्स के साझेदार देश बने।

ब्रिक्स दुनिया की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक मंच पर लाता है और इसी कारण यह एक प्रभावशाली समूह के रूप में उभरा है। इन देशों की वैश्विक आबादी में करीब 49.5 प्रतिशत, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में करीब 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार में करीब 26 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का विषय ‘लचीलापन, नवोन्मेष, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण’ है जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘मानवता प्रथम’ की भावना पर आधारित जन-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाता है।

मंत्रालय ने बताया कि इन क्षेत्रों के अलावा नेता साझा प्राथमिकताओं पर ब्रिक्स के भीतर सहयोग मजबूत करने पर विचार-विमर्श करेंगे और आपसी महत्व के वैश्विक एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर अपने विचार साझा करेंगे।

उसने कहा, ‘‘इस वर्ष भारत की अध्यक्षता में देश के 25 से अधिक शहरों में 350 से अधिक बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जिनका उद्देश्य ‘राजनीतिक एवं सुरक्षा’, ‘आर्थिक एवं वित्तीय’ और ‘सांस्कृतिक एवं लोगों के बीच आपसी संपर्क’ के तीन मूल स्तंभों पर ब्रिक्स की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है।’’

भारत ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य है और इससे पहले वह 2012, 2016 और 2021 में तीन बार इसकी अध्यक्षता कर चुका है। भारत ने एक जनवरी को चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली।

भाषा सिम्मी नरेश

नरेश