मुंबई, 27 अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र के आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके ने बृहस्पतिवार को पुणे में प्रदर्शन कर रहे आदिवासी विद्यार्थियों से अपना आंदोलन समाप्त करने की अपील करते हुए कहा कि सरकार विद्यार्थियों की चिंताओं का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
छात्रों के एक समूह की भूख हड़ताल बृहस्पतिवार को 15वें दिन में प्रवेश कर गई। उइके ने बुधवार देर रात पुणे में प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों से मुलाकात की थी।
उन्होंने बाद में कहा कि विद्यार्थियों की ज्यादातर मांगें स्वीकार कर ली जाएंगी। मंत्री ने विद्यार्थियों से विपक्षी दलों के ‘‘जाल’’ में नहीं फंसने की अपील की।
उन्होंने बृहस्पतिवार को मुंबई में कहा, ‘‘हमने आदिवासी छात्रावासों में प्रवेश के लिए 30 वर्ष की आयु सीमा संबंधी राज्य सरकार का पिछला आदेश रद्द कर दिया है।’’
उइके ने कहा कि सरकार ने छात्रों को यह भी आश्वासन दिया है कि विभिन्न शहरों से आने वाले आदिवासी विद्यार्थियों के लिए उचित आवास की उनकी मांग को पूरा करने के लिए सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय (एसपीपीयू) परिसर में छात्रावास बनवाया जाएगा।
मंत्री ने जाति वैधता प्रमाणपत्र के मुद्दे पर जोर देकर कहा कि जब तक छात्र जाति वैधता प्रमाणपत्र जमा नहीं करते, तब तक कॉलेज और विश्वविद्यालय उन्हें स्नातक या पाठ्यक्रम पूरा करने का प्रमाणपत्र जारी न करें।
उन्होंने कहा कि जाति वैधता प्रमाणपत्र के बिना विद्यार्थियों को स्थानांतरण प्रमाणपत्र भी जारी नहीं किया जाएगा।
उइके ने बताया कि इस संबंध में सभी संबंधित विभागों को लिखित आदेश जारी कर दिए गए हैं।
कॉलेजों के आदिवासी छात्रों का एक समूह छात्रावास सुविधाओं, प्रवेश नियमों और अन्य मुद्दों से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर पिछले 15 दिनों से एक छात्रावास में प्रदर्शन कर रहा है।
इनमें से कुछ छात्र भूख हड़ताल पर हैं।
बुधवार को कई राजनेताओं ने प्रदर्शन स्थल का दौरा कर आंदोलन कर रहे छात्रों के प्रति समर्थन जताया।
भाषा जितेंद्र संतोष
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