प्रमाणित गुणवत्ता मानकों के साथ होम्योपैथी क्षेत्र का नेतृत्व करने के लिए तैयार है भारत : विशेषज्ञ

प्रमाणित गुणवत्ता मानकों के साथ होम्योपैथी क्षेत्र का नेतृत्व करने के लिए तैयार है भारत : विशेषज्ञ

प्रमाणित गुणवत्ता मानकों के साथ होम्योपैथी क्षेत्र का नेतृत्व करने के लिए तैयार है भारत : विशेषज्ञ
Modified Date: March 8, 2026 / 06:37 pm IST
Published Date: March 8, 2026 6:37 pm IST

(पायल बनर्जी)

नयी दिल्ली, आठ मार्च (भाषा) भारत में होम्योपैथी का क्षेत्र काफी व्यापक स्तर पर फैला हुआ है और अब हमारा देश वैश्विक स्तर पर दुनिया में इसका नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

भारत में होम्योपैथी का क्षेत्र मजबूत नैदानिक ​​विशेषज्ञता, व्यापक चिकित्सक नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त गुणवत्ता प्रमाणपत्रों और मानकों द्वारा संचालित है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन कारकों के चलते भारत आने वाले समय में वैश्विक होम्योपैथी उद्योग में एक प्रमुख भूमिका निभा सकता है और इस क्षेत्र में नयी संभावनाओं के द्वार खुल सकते हैं।

आयुष विशेषज्ञों का कहना है कि दशकों से, जर्मनी के होम्योपैथी ब्रांडों ने वैश्विक स्तर पर अपनी एक उत्कृष्ट प्रतिष्ठा कायम रखी है और अक्सर उन्हें गुणवत्ता, निरंतरता और अनुसंधान-समर्थित विनिर्माण क्षेत्र में स्वर्ण मानक के रूप में देखा जाता है।

उन्होंने कहा कि भारत न केवल उनके बराबर पहुंचने की राह पर है, बल्कि दो शक्तिशाली गुणवत्ता ढांचों – आयुष प्रीमियम मार्क और एनएबीएल मान्यता के चलते उनसे आगे निकलने की राह पर भी है।

होम्योपैथी क्षेत्र से जुड़े उद्योग जगत की रिपोर्टों के अनुसार, देश में 25 लाख से अधिक पंजीकृत होम्योपैथी चिकित्सक और लगभग 300 शिक्षण संस्थान हैं। इसके अलावा देश में लाखों मरीज होम्योपैथी को अपनी प्राथमिक या पूरक चिकित्सा पद्धति के रूप में अपनाते हैं।

वैश्विक होम्योपैथी बाजार का मूल्य आठ से 10 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है, जिसमें यूरोप की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है और इस पर ऐतिहासिक रूप से जर्मनी का वर्चस्व रहा है। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि गुणवत्ता के बल पर स्थापित भारतीय ब्रांड अब इस प्रभुत्व को चुनौती देने के लिए अच्छी स्थिति में हैं।

अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) के निदेशक डॉ. प्रदीप प्रजापति ने कहा, ‘‘मुख्य अंतर प्रमाणित गुणवत्ता और वैज्ञानिक सत्यापन में निहित है।’’

उन्होंने कहा कि आयुष मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया आयुष प्रीमियम मार्क, आयुष उत्पादों के निर्माण, सुरक्षा और गुणवत्ता प्रबंधन में वैश्विक स्तर के अनुपालन का प्रतिनिधित्व करता है।

डॉ. प्रजापति ने बताया कि एनएबीएल (नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेटरीज) प्रमाणन परीक्षण और गुणवत्ता नियंत्रण में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित सटीकता, विश्वसनीयता और पुनरुत्पादकता सुनिश्चित करता है।

आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ प्रतिनिधि राजेश्वर तिवारी ने कहा कि होम्योपैथी में भारत के पास अद्वितीय नैदानिक ​​डेटा, चिकित्सकों की संख्या और रोगियों की विविधता मौजूद है।

राजेश्वर तिवारी ने कहा, ‘‘ जब इस अनुभवजन्य लाभ को आयुष प्रीमियम और एनएबीएल जैसे प्रमाणित गुणवत्ता मानकों का समर्थन प्राप्त होता है, तो भारतीय होम्योपैथी को वैश्विक स्तर पर तुलनीय वैज्ञानिक विश्वसनीयता प्राप्त होती है। अनुसंधान, विनियमन और विनिर्माण उत्कृष्टता का यह एकीकरण स्थापित यूरोपीय ब्रांडों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए आवश्यक है।’’

इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण उदाहरण एडवेन बायोटेक है, जो आयुष प्रीमियम मार्क और एनएबीएल प्रमाणन दोनों प्राप्त करने वाली भारत की पहली होम्योपैथी कंपनी बन गई है।

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