भारत में कृत्रिम मेधा के लिए अच्छे ‘नियामक ढांचा’ का अभाव: ओडिशा के भाजपा सांसद

भारत में कृत्रिम मेधा के लिए अच्छे ‘नियामक ढांचा’ का अभाव: ओडिशा के भाजपा सांसद

भारत में कृत्रिम मेधा के लिए अच्छे ‘नियामक ढांचा’ का अभाव: ओडिशा के भाजपा सांसद
Modified Date: January 31, 2026 / 08:42 pm IST
Published Date: January 31, 2026 8:42 pm IST

अहमदाबाद, 31 जनवरी (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज्यसभा सदस्य सुजीत कुमार ने शनिवार को कहा कि भारत में कृत्रिम मेधा (एआई) से संबंधित एक मजबूत नियामक ढांचा (रेगुलेटरी फ्रेमवर्क) का अभाव है।

उन्होंने यहां ‘आई-हब एआई फाउंडर्स मीट’ में उद्यमियों को संबोधित करते हुए कहा कि वह केंद्र सरकार से एक ‘नियामक ढांचा’ और कुछ कानूनों पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह करते रहे हैं।

कुमार ने कहा, “भारत के एआई मिशन के तहत हमारे पास अच्छी क्लाउड एआई अवसंरचना, बनाए जा रहे डेटा सेंटर और प्रतिभाओं का भंडार है लेकिन एक मजबूत ‘नियामक ढांचा’ की कमी है। भारत अब भी आईटी अधिनियम 2000 से निर्देशित है। लेकिन तकनीकी जगत में 26 साल बहुत लंबा समय होता है। तकनीक लगभग हर हफ्ते विकसित हो रही है।”

उन्होंने दावा किया कि एआई से होने वाले कई अपराध और जुर्म अदालतों में पहुंच रहे हैं, जो किसी ‘नियामक ढांचा’ और मार्गदर्शन के लिए न्यायिक मिसालों के अभाव में ऐसे मामलों को सुलझाने में असमर्थ हैं।

कुमार ने जोर देकर कहा कि स्वास्थ्य सेवा, कृषि, आपदा प्रबंधन, सुशासन और अंतिम छोर तक पहुंच जैसी चुनौतियों को हल करने में एआई बहुत मददगार साबित होगा।

भाषा जितेंद्र संतोष

संतोष


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