भारत, वियतनाम ने अपने संबंधों को बढ़ाकर व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाया

भारत, वियतनाम ने अपने संबंधों को बढ़ाकर व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाया

भारत, वियतनाम ने अपने संबंधों को बढ़ाकर व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाया
Modified Date: May 6, 2026 / 05:02 pm IST
Published Date: May 6, 2026 5:02 pm IST

(फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, छह मई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम के बीच हुई वार्ता के बाद बुधवार को भारत और वियतनाम ने अपने संबंधों को बढ़ाकर व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाने का निर्णय लिया और 2030 तक 25 अरब डॉलर के वार्षिक व्यापार का लक्ष्य तय किया।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने भूराजनीतिक उतार-चढ़ाव के बीच व्यापार, रक्षा और दुर्लभ खनिजों के क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंधों के विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया।

मोदी-लाम की मुलाकात के बाद दोनों पक्षों ने 13 समझौतों पर हस्ताक्षर किए जो डिजिटल भुगतान, दुर्लभ खनिजों, फार्मास्युटिकल्स, शिक्षा, बैंकिंग और संस्कृति समेत विभिन्न क्षेत्रों में गहन दोतरफा साझेदारी का मार्ग खोलेंगे।

मोदी और लाम ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की दबदबा बढ़ाने की कोशिशों के बीच क्षेत्र की स्थिति पर भी चर्चा की और कानून व्यवस्था, शांति, स्थिरता और समृद्धि में योगदान देते रहने पर भी सहमति जताई।

समझा जाता है कि दक्षिण चीन सागर में चीन का बढ़ता सैन्य दबदबा भी दोनों पक्षों की प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में सामने आया।

इस महीने की शुरुआत में ही राष्ट्रपति निर्वाचित हुए लाम ने मंगलवार को भारत की अपनी पहली राजकीय यात्रा शुरू की। वह तीन दिवसीय यात्रा पर आए हैं और एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कर रहे हैं।

मोदी ने अपने मीडिया वक्तव्य में कहा, ‘‘एक दशक पहले, वियतनाम आसियान (दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ) में भारत का पहला व्यापक रणनीतिक साझेदार बना। तब से, हमारे संबंधों ने तीव्र और व्यापक प्रगति की है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इस मज़बूत नींव पर आगे बढ़ते हुए, आज हम अपने संबंधों को ‘बेहतर व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक ले जा रहे हैं। अब हम अपनी साझेदारी को और भी ऊंचे लक्ष्यों की ओर आगे बढ़ाएंगे।’’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हमारा सहयोग हर क्षेत्र में नए स्तरों तक पहुंचेगा—संस्कृति, संपर्क और क्षमता निर्माण के साथ-साथ सुरक्षा, स्थिरता और आपूर्ति शृंखला की मजबूती में भी।’’

उन्होंने कहा कि भारत और वियतनाम के बीच द्विपक्षीय व्यापार पिछले दशक में दोगुना होकर 16 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है और अब इसे 2030 तक 25 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है।

मोदी ने दोनों देशों के बीच हस्ताक्षरित अनेक समझौतों का भी हवाला दिया, ताकि इस बात पर जोर दिया जा सके कि आने वाले समय में आर्थिक साझेदारी में उल्लेखनीय तेज़ी आने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे दवा प्राधिकरणों के बीच हुए एमओयू से अब वियतनाम में भारतीय दवाओं की उपलब्धता बढ़ेगी। वियतनाम को भारतीय कृषि, मत्स्य पालन और पशु उत्पादों का निर्यात भी अब और आसान हो जाएगा। बहुत जल्द, वियतनाम भारत के अंगूर और अनार का स्वाद चखेगा।’’

उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने इस साल के अंत तक भारत-आसियान व्यापार समझौते को उन्नत करने पर भी रजामंदी व्यक्त की।

मोदी ने कहा, ‘‘इससे भारत और सभी आसियान देशों के बीच व्यापार और निवेश को एक नई गति मिलेगी। महत्वपूर्ण खनिजों, दुर्लभ मृदा तत्वों और ऊर्जा सहयोग के क्षेत्र में नई पहलें दोनों देशों की आर्थिक सुरक्षा और आपूर्ति

शृंखला की सुदृढ़ता सुनिश्चित करेंगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘वित्तीय संपर्क को मजबूती प्रदान करने के लिए हमने आज हमारे केंद्रीय बैंकों के बीच सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है। भारत का यूपीआई और वियतनाम की भुगतान प्रणाली को जल्द जोड़ा जाएगा। हम दोनों देशों के बीच राज्यों तथा शहरों के सहयोग को मजबूत कर रहे हैं।’’

मोदी ने कहा कि भारत, पहलगाम आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करने और आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में भारत के साथ खड़े रहने के लिए वियतनाम का आभारी है।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘अब, हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी के माध्यम से हम एक दूसरे के त्वरित विकास का समर्थन करेंगे। जैसा कि भगवान बुद्ध की शिक्षाओं में कहा गया है कि ‘‘अगर आप किसी के लिए दीप जलाते हैं तो आपका भी मार्ग प्रज्वलित होता है।’’

मोदी ने कहा कि दोनों देशों का हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए साझा दृष्टिकोण है और दोनों पक्ष कानून के शासन, शांति, स्थिरता और समृद्धि में अपना योगदान जारी रखेंगे।

समझा जाता है कि दोनों पक्षों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में चीन की बढ़ती सैन्य शक्ति के प्रदर्शन का मुद्दा भी शामिल था।

मोदी ने कहा, ‘‘वियतनाम भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और ‘विजन ओशन’ का एक प्रमुख स्तंभ है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भी, हम एक समान दृष्टिकोण साझा करते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करके हम कानून के शासन, शांति, स्थिरता और समृद्धि में योगदान देना जारी रखेंगे।’’

पिछले साल, दोनों पक्षों ने पनडुब्बी खोज, बचाव और सहायता तंत्र के लिए एक ढांचा स्थापित करने से संबंधित एक समझौता पर हस्ताक्षर किया था। उन्होंने द्विपक्षीय रक्षा उद्योग सहयोग को मजबूत करने के लिए आशय पत्र (एलओआई) पर भी हस्ताक्षर किए।

भाषा वैभव माधव

माधव


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