ब्लड प्रेशर की फर्जी दवाइयों की आपूर्ति करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़, दो लोग गिरफ्तार

ब्लड प्रेशर की फर्जी दवाइयों की आपूर्ति करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़, दो लोग गिरफ्तार

ब्लड प्रेशर की फर्जी दवाइयों की आपूर्ति करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़, दो लोग गिरफ्तार
Modified Date: July 20, 2026 / 03:18 pm IST
Published Date: July 20, 2026 3:18 pm IST

गुरुग्राम, 20 जुलाई (भाषा) हरियाणा खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने गुरुग्राम और दिल्ली पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई में रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) की नकली दवाइयों की आपूर्ति करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया। इस मामले में राष्ट्रीय राजधानी और उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से दो लोगों को गिरफ्तार किया गया। एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।

एफडीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरोपी ‘टेल्मिसार्टन एएम’ नाम की नकली दवा की खेप हरियाणा और दिल्ली के बाजारों में आपूर्ति कर रहे थे।

यह दवा उच्च रक्तचाप के इलाज में इस्तेमाल की जाती है।

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दिल्ली निवासी सुब्रत द्विवेदी और उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद निवासी जुबैर के रूप में हुई है।

जिला औषधि नियंत्रक अमनदीप चौहान ने बताया, “अब तक हमने नकली टेल्मा-एएम के 178 पत्ते बरामद किये गये हैं। जांच में सामने आया कि 350 रुपये एमआरपी वाले कुल 1,700 पत्ते खरीदे गये थे। मामले की जांच जारी है।”

एफडीए को सूचना मिली थी कि गुरुग्राम में ‘श्री बालाजी फोरम’ नाम से संचालित एक थोक दवा एजेंसी के जरिए नकली दवाइयों की आपूर्ति की जा रही है।

संबंधित एजेंसी के पास दवाओं का कारोबार करने के लिए आवश्यक वैध लाइसेंस नहीं था।

एफडीए अधिकारियों के अनुसार, नकली दवाओं की बिक्री की सूचना मिलने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर तीन अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित की गई और मामले की जांच शुरू की गई।

उन्होंने बताया कि मामले की जांच के दौरान टीम आरोपियों तक पहुंची और दिल्ली व मुरादाबाद से दो लोगों को गिरफ्तार किया।

अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि नकली दवाइयों का निर्माण उत्तराखंड के रुड़की में किया जाता था और इसके बाद इन्हें लखनऊ के रास्ते हरियाणा, दिल्ली और अन्य इलाकों में पहुंचाया जाता था।

अधिकारियों ने बताया कि अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और उस फैक्टरी की पहचान करने की कोशिश की जा रही है जहां इन नकली दवाइयों का निर्माण किया जाता था।

भाषा जितेंद्र नरेश

नरेश


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