पुरी के जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने इस्कॉन के धार्मिक उत्सव आयोजित करने पर जताई चिंता

पुरी के जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने इस्कॉन के धार्मिक उत्सव आयोजित करने पर जताई चिंता

पुरी के जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने इस्कॉन के धार्मिक उत्सव आयोजित करने पर जताई चिंता
Modified Date: April 12, 2026 / 04:18 pm IST
Published Date: April 12, 2026 4:18 pm IST

पुरी, 12 अप्रैल (भाषा) ओडिशा के पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने इस्कॉन द्वारा पारंपरिक तिथियों से अलग समय पर धार्मिक उत्सव आयोजित करने पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

मंदिर प्रशासन ने कहा है कि इस मुद्दे से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अवगत करा दिया गया है और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति (एसजेटीएमसी) के प्रमुख गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब की अध्यक्षता में ‘ऐक्य स्थापना मंडली’ की बैठक हुई, जिसमें इस विषय पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) द्वारा रथ यात्रा और स्नान यात्रा जैसे प्रमुख उत्सव निर्धारित धार्मिक तिथियों से अलग समय पर आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे भगवान जगन्नाथ के भक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं।

देब ने संवाददाताओं से कहा कि इस तरह की चीजों से भगवान जगन्नाथ के लाखों भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंची है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने प्रधानमंत्री को इस बात से अवगत कराया है कि सदियों पुरानी परंपराओं की अनदेखी करते हुए दुनिया भर में पारंपरिक तिथियों को छोड़ कर अन्य तिथि पर रथ यात्राएं आयोजित की जा रही हैं। इस मामले में कानूनी उपाया अपनाना हमारा अंतिम विकल्प हो सकता है।’’

मंदिर प्रशासन ने यह भी बताया कि इस मामले को विदेश मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय के समक्ष उठाया जाएगा। साथ ही, इस्कॉन के मायापुर स्थित मुख्यालय को दोबारा पत्र लिखने की भी योजना है।

देब के अनुसार, अक्टूबर 2025 में इस्कॉन ने आश्वासन दिया था कि वह वैश्विक स्तर पर पारंपरिक तिथियों से इतर स्नान यात्रा और भारत में रथ यात्रा आयोजित नहीं करेगा, लेकिन इस वादे का पालन नहीं किया गया है।

देब और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाधी द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में दावा किया गया कि इस्कॉन ने शास्त्रों के नियमों से हटकर 79 स्थानों पर ‘नियमों के विरुद्ध’ रथ यात्राएं और 10 स्नान यात्राएं आयोजित कीं।

मंदिर प्रशासन के अधिकारियों ने अपनी अपील को दोहराते हुए इस्कॉन से आग्रह किया कि वह यह सुनिश्चित करे कि रथ यात्रा और स्नान यात्रा जैसे प्रमुख त्योहारों का पालन धर्म ग्रंथों और प्राचीन परंपराओं में निर्धारित तिथियों के अनुसार किया जाए।

देब ने सवाल किया, “ज्येष्ठ पूर्णिमा को मनाई जाने वाली स्नान यात्रा, जो भगवान का जन्म दिवस है, उसे कोई कैसे बदल सकता है? क्या भगवान श्रीकृष्ण, भगवान श्रीराम, ईसा मसीह या पैगंबर मोहम्मद की जन्मतिथि बदली जा सकती है?”

भाषा रवि कांत रवि कांत सुभाष

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