जम्मू-कश्मीर: 17 पूर्व छात्रों के आतंकी संगठनों में शामिल होने के बाद मदरसा गैरकानूनी घोषित

जम्मू-कश्मीर: 17 पूर्व छात्रों के आतंकी संगठनों में शामिल होने के बाद मदरसा गैरकानूनी घोषित

जम्मू-कश्मीर: 17 पूर्व छात्रों के आतंकी संगठनों में शामिल होने के बाद मदरसा गैरकानूनी घोषित
Modified Date: April 28, 2026 / 06:40 pm IST
Published Date: April 28, 2026 6:40 pm IST

श्रीनगर, 28 अप्रैल (भाषा) दारुल उलूम जामिया सिराजुल उलूम के 17 पूर्व छात्रों के आतंकवादी संगठनों में शामिल होने और बाद में अलग-अलग मुठभेड़ों में मारे जाने के बाद अधिकारियों ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएईपीए) के तहत मदरसे को गैरकानूनी घोषित कर दिया है। एक पुलिस अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

अधिकारी ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा, ‘‘संस्थान के 17 पूर्व छात्र आतंकवादी संगठनों में शामिल हो गए और बाद में अलग-अलग मुठभेड़ों में मारे गए, जो कि विचारधारा थोपने और भर्ती करने के एक सुसंगत पैटर्न को दर्शाता है।’’

कश्मीर के संभागीय आयुक्त अंशुल गर्ग ने 24 अप्रैल को शोपियां के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा पेश एक दस्तावेज के आधार पर दो पृष्ठों का आदेश जारी किया, जिसमें शोपियां के इमाम साहिब स्थित दारुल उलूम जामिया सिराजुल उलूम में कथित अवैध गतिविधियों की ओर इशारा किया गया था।

गर्ग के आदेश के अनुसार, ‘‘संस्थान के जमात-ए-इस्लामी के साथ निरंतर और गुप्त संबंधों को इंगित करने वाले विश्वसनीय इनपुट और साक्ष्य रिकॉर्ड पर मौजूद हैं’’। जमात-ए-इस्लामी पर केंद्र ने 2019 में प्रतिबंध लगा दिया था।

आदेश में कहा गया है कि प्रतिबंधित संगठन से जुड़े व्यक्तियों का संस्थान पर वास्तविक नियंत्रण था, जिसमें उन्हें प्रमुख प्रशासनिक और शैक्षणिक पदों पर नियुक्त करना भी शामिल था।

इसमें कहा गया है कि समय के साथ इस संस्थान ने कट्टरपंथ अनुकूल माहौल बनाया और इसके कई पूर्व छात्र आतंकी गतिविधियों में शामिल रहे। हालांकि, संस्थान के अध्यक्ष मोहम्मद शफी लोन ने कहा कि उनका जमात-ए-इस्लामी या किसी भी अवैध संगठन से कोई संबंध नहीं है।

लोन ने पत्रकारों से कहा, ‘‘ हम कानून का पालन करने वाले संस्थान हैं और प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी से हमारा कोई संबंध नहीं है। वर्तमान में स्कूल में 814 छात्र नामांकित हैं, जो स्कूल शिक्षा बोर्ड और कश्मीर स्कूल फेडरेशन से संबद्ध है।’’

उन्होंने कहा कि संस्थान को पिछले महीने अधिकारियों से कारण बताओ नोटिस मिला था, जिसका उसने विधिवत जवाब दिया था।

लोन ने कहा, ‘‘ अगर अधिकारियों को फिर भी कोई संदेह है, तो उन्हें एक समिति गठित करके हमारे संस्थान के खिलाफ लगे आरोपों की जांच करनी चाहिए। अगर ये आरोप सही साबित होते हैं, तो सरकार जो भी कार्रवाई करने का फैसला करेगी हम उसका समर्थन करेंगे।’’

अधिकारी ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को समय-समय पर ऐसी प्रतिकूल रिपोर्टें मिली हैं जिनसे पता चलता है कि यह संस्थान राष्ट्रीय सुरक्षा और राज्य की अखंडता के लिए हानिकारक गतिविधियों में शामिल है।

उन्होंने कहा, ‘‘जानकारी से यह भी पता चला है कि वहां एक ऐसा माहौल था जो गैरकानूनी और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देता था। मारे गए आतंकवादियों के कई करीबी रिश्तेदार जामिया सिराजुल उलूम में महत्वपूर्ण पदों पर हैं।’

अधिकारी ने बताया कि कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी के सदस्य बिचौलियों के माध्यम से काम कर रहे थे और गुप्त रूप से अपना एजेंडा चला रहे थे।

भाषा शोभना पवनेश

पवनेश


लेखक के बारे में