जमशेदपुरः करणी सेना के नेता की मौत के मामले में तीन लोग गिरफ्तार, निषेधाज्ञा लागू

जमशेदपुरः करणी सेना के नेता की मौत के मामले में तीन लोग गिरफ्तार, निषेधाज्ञा लागू

जमशेदपुरः करणी सेना के नेता की मौत के मामले में तीन लोग गिरफ्तार, निषेधाज्ञा लागू
Modified Date: July 1, 2026 / 07:24 pm IST
Published Date: July 1, 2026 7:24 pm IST

जमशेदपुर, एक जुलाई (भाषा) झारखंड पुलिस ने करणी सेना नेता हिमांशु सिंह की हत्या में कथित रूप से शामिल तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।

वहीं, आरोपियों की गिरफ्तारी तक शव लेने से इनकार कर रहे हिमांशु के परिवार ने लिखित समझौते के बाद अंतिम संस्कार करने पर सहमति दे दी।

पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन ने कथित छेड़छाड़ के विरोध के दौरान हुई मारपीट और हमले में करणी सेना के स्थानीय नेता की मौत के बाद हिंसक प्रदर्शन की आशंका के मद्देनजर बुधवार को कुछ इलाकों में निषेधाज्ञा लागू कर दी।

जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित एक बार में कथित छेड़छाड़ का विरोध करने के दौरान शनिवार को हुई मारपीट व हमले में करणी सेना नेता हिमांशु सिंह (28) घायल हो गए थे।

चोटों के कारण सिंह की मौत हो गई, जिसके बाद सोमवार रात बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए।

कोल्हान क्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) अनुरंजन किस्पोट्टा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “हमने हिमांशु हत्या मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके (हिमांशु के) परिवार के सदस्यों ने कहा था कि जब तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता और जिन पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में उन पर चाकू से हमला किया गया था, उनके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज नहीं किया जाता, तब तक वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। हालांकि, अधिकारियों के साथ समझौते के बाद उन्होंने आज अंतिम संस्कार के लिए शव ले लिया।”

पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात की और उन्हें शव स्वीकार कर अंतिम संस्कार करने के लिए राजी किया।

मंगलवार देर रात पोस्टमार्टम किया गया था।

करणी सेना के नेता के परिवार ने शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया था और सोमवार रात कहा था कि प्रशासन 48 घंटे के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार करे तथा उस समय मौजूद पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई करे, जब हिमांशु पर चाकू से हमला किया गया था।

अधिकारी ने बताया कि पीड़ित परिवार की अन्य मांगों के संबंध में आवश्यक कार्रवाई के लिए राज्य के पुलिस महानिदेशक को एक सिफारिश भेज दी गई है।

सिंह की पत्नी को सरकारी नौकरी देने की भी मांग की गई।

धालभूम के उप-मंडलाधिकारी (एसडीओ) अर्नव मिश्रा ने बुधवार को 48 घंटे की समयसीमा समाप्त होने और अधिक विरोध प्रदर्शनों की आशंका के मद्देनजर शहर के साकची, बिष्टुपुर, सोनारी, कदमा, मानगो और एमजीएम थाना क्षेत्रों में बीएनएसएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी।

धालभूम के उप-मंडलाधिकारी (एसडीओ) अर्नव मिश्रा ने बुधवार को 48 घंटे की समयसीमा समाप्त होने और अधिक विरोध प्रदर्शनों की आशंका के मद्देनजर शहर के साकची, बिष्टुपुर, सोनारी, कदमा, मानगो और एमजीएम थाना क्षेत्रों में बीएनएसएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी।

मिश्रा ने बुधवार को जारी एक अधिसूचना में बताया कि प्रशासन को हत्या के विरोध में सड़क जाम और प्रदर्शन होने की सूचना मिली है, जिससे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

अधिसूचना में बताया गया कि अगले आदेश तक ये प्रतिबंध लागू रहेंगे।

पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता रघुवर दास ने हिमांशु सिंह के परिवार से मुलाकात की और बाद में दावा किया कि जब आरोपी करणी सेना नेता और उनके मित्र पर पहले गश्ती वाहन के अंदर और फिर उन्हें बाहर खींचकर चाकू से हमला कर रहे थे, तब पुलिस मूकदर्शक बनी रही।

उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों करीब आधे घंटे तक दर्द से तड़पते रहे लेकिन पुलिस ने उन्हें अस्पताल पहुंचाने में कोई तत्परता नहीं दिखाई।

दास ने कहा कि भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त राजीव रंजन को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें घटना के समय मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने और सिंह की पत्नी को सरकारी नौकरी देने की मांग की गई।

उन्होंने झामुमो के नेतृत्व वाली सरकार को ‘जनता की नहीं, बल्कि अपराधियों और माफिया की सरकार’ बताया।

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है और राज्य में आपराधिक गतिविधियां बढ़ रही हैं।

उन्होंने सिंह और उनके मित्र पर हमला करने वाले आरोपियों के आत्मसमर्पण नहीं करने की स्थिति में उनके घरों पर बुलडोजर चलाने की मांग की।

सोमवार रात गुस्साई भीड़ ने, जिसमें मृतक के परिजन भी शामिल थे, बिष्टुपुर में करीब छह घंटे तक सड़क जाम की, जिससे यातायात बाधित हुआ।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार देर रात पूर्वी सिंहभूम के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पीयूष पांडे और सरायकेला-खरसांव की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक निधि द्विवेदी को आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश नहीं लगा पाने को लेकर हटाने के आदेश दिए।

चाकूबाजी की घटना से जुड़े मामले में कथित लापरवाही के आरोप में चार पुलिसकर्मियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।

सोरेन की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए दास ने कहा कि अगर सरकार यह कदम थोड़ा पहले उठाती तो अपराध की घटना को रोका जा सकता था। उन्होंने कहा कि राज्य की कानून-व्यवस्था चिंता का विषय बन गई है।

वहीं, झामुमो प्रवक्ता कुणाल सारंगी ने पीटीआई-भाषा से कहा कि झारखंड के मुख्यमंत्री और पुलिस प्रमुख स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और राज्य सरकार की अपराध के प्रति इसे कतई बर्दाश्त नहीं करने नीति है।

भाषा जितेंद्र नरेश

नरेश


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