‘जन नायकन’ प्रमाणन विवाद:कांग्रेस ने केंद्र को ठहराया जिम्मेदार, अन्नाद्रमुक ने आरोपों का खंडन किया

‘जन नायकन’ प्रमाणन विवाद:कांग्रेस ने केंद्र को ठहराया जिम्मेदार, अन्नाद्रमुक ने आरोपों का खंडन किया

‘जन नायकन’ प्रमाणन विवाद:कांग्रेस ने केंद्र को ठहराया जिम्मेदार, अन्नाद्रमुक ने आरोपों का खंडन किया
Modified Date: January 8, 2026 / 04:35 pm IST
Published Date: January 8, 2026 4:35 pm IST

चेन्नई, आठ जनवरी (भाषा) कांग्रेस नेता प्रवीण चक्रवर्ती और एस ज्योतिमणि ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की वजह से सीबीएफसी ने अभिनय से राजनीति में आए विजय की बहुभाषी फिल्म ‘जना नायकन’ को मंजूरी नहीं दी जिसे तय कार्यक्रम के तहत नौ जनवरी को प्रदर्शित किया जाना था।

हालांकि केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सहयोगी ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक)के पूर्व मंत्री सेल्लूर के राजू ने दावा किया कि इसमें केंद्र सरकार की कोई भूमिका नहीं है क्योंकि किसी भी फिल्म के प्रमाणन का कार्य सिर्फ केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) करता है।

निर्माता ने इस मामले को लेकर मद्रास उच्च न्यायालय का रुख किया है। विजय की कथित आखिरी फिल्म का निर्माण करने वाले केवीएन प्रोडक्शंस ने घोषणा की है कि वह भारी मन से फिल्म ‘जन नायकन’ के प्रदर्शन को टाल रही है क्योंकि इन परिस्थितियों पर उनका कोई नियंत्रण नहीं है।

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ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस और डेटा एनालिटिक्स के अध्यक्ष चक्रवर्ती ने कहा, ‘‘नौ साल पहले राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री (नरेन्द्र)मोदी को चेतावनी दी थी कि तमिल सिनेमा को दबाकर तमिल संस्कृति और गौरव का अपमान न करें।’’

उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘ लेकिन नरेन्द्र मोदी ने जानबूझकर ‘जन नायकन’ का सीबीएफसी प्रमाणन रोक कर और उसके प्रदर्शन को बाधित कर तमिल लोगों का फिर से अपमान किया है।’’

चक्रवर्ती ने अपने बयान के समर्थन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रधानमंत्री मोदी को संबोधित उस वक्तव्य का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि सिनेमा तमिल संस्कृति और भाषा की गहरी अभिव्यक्ति है और विजय की फिल्म ‘मर्सल’ में हस्तक्षेप करके तमिल गौरव को बदनाम करने की कोशिश न करें। ‘मर्सल’ फिल्म जीएसटी के कथित नकारात्मक संदर्भों पर भाजपा की आपत्ति के कारण विवादों में घिर गई थी।

करूर से कांग्रेस सांसद ज्योतिमणि ने कहा कि फिल्म को प्रमाणन देने से इनकार करना ‘तमिल फिल्म उद्योग पर हमला’ है। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में विश्वास रखने वाले हर व्यक्ति को, चाहे उनकी राजनीतिक संबद्धता और पसंद-नापसंद कुछ भी हो, इसकी निंदा करनी चाहिए।

ज्योतिमणि ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘एक फिल्म सैकड़ों लोगों की कड़ी मेहनत और करोड़ों रुपये के निवेश से बनती है। इस तरह इसे रोकना रचनात्मक स्वतंत्रता के बिल्कुल खिलाफ है। राजनीतिक कारणों से इसे रोकना तो और भी खतरनाक है।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और आयकर विभाग के साथ सेंसर बोर्ड (सीबीएफसी)‘‘मोदी सरकार का एक राजनीतिक हथियार’’ बन गया है। उन्होंने कहा, ‘‘हम चुपचाप खड़े होकर यह सब नहीं देख सकते।’’

इसी बीच, अन्नाद्रमुक के नेता राजू ने मदुरै में संवाददाताओं से कहा कि हर चीज के लिए केंद्र को दोष देना उचित नहीं है। उन्होंने सवाल किया, ‘‘यह (केंद्र पर निशाना साधना)राजनीतिक रूप से प्रेरित है। केंद्र एक फिल्म के लिए क्यों परेशानी खड़ी करने की कोशिश करेगा?’’

भाषा धीरज पवनेश

पवनेश


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