आवासीय भूमि के व्यावसायिक इस्तेमाल पर जेडीएटी सख्त, मौके के निरीक्षण के निर्देश
आवासीय भूमि के व्यावसायिक इस्तेमाल पर जेडीएटी सख्त, मौके के निरीक्षण के निर्देश
जयपुर, 12 अगस्त (भाषा) जयपुर विकास प्राधिकरण अपीलीय अधिकरण (जेडीएटी) ने एक रिसॉर्ट समेत अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े भूमि विवाद में मौके का निरीक्षण कराने का निर्देश दिया है।
अधिकरण ने कहा कि यदि संपत्ति पर व्यावसायिक गतिविधियां पाई जाती हैं तो जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकता है।
अधिकरण के पीठासीन अधिकारी महावीर प्रसाद गुप्ता ने 10 अगस्त को जारी आदेश में भूमि के उपयोग और उससे जुड़ी रियल एस्टेट गतिविधियों की स्थिति को रेखांकित किया। अपीलकर्ता की ओर से अधिकरण को बताया गया कि संबंधित भूमि को 16 सितंबर 2005 को धारा 90-बी के तहत कृषि उपयोग से आवासीय उपयोग में परिवर्तित किया गया था।
विवाद उस समय सामने आया जब जेडीए ने संबंधित भूमि पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित किए जाने और निर्माण संबंधी नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कार्रवाई शुरू की।
जेडीए का कहना था कि आवश्यक स्वीकृतियां लिए बिना भूमि का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।
हालांकि, अपीलकर्ता के अधिवक्ता मोहन सिंह सोलंकी ने अधिकरण के समक्ष जेडीए की कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि भूमि को पहले ही धारा 90-बी के तहत कृषि से आवासीय उपयोग में परिवर्तित किया जा चुका है और वहां कोई व्यावसायिक गतिविधि संचालित नहीं की जा रही है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, मुख्य सवाल यह है कि क्या आवासीय उपयोग में परिवर्तित भूमि पर रिसॉर्ट या किसी अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान का संचालन किया जा सकता है खासकर तब, जब 90-बी के तहत हुए भूमि रूपांतरण की सीमा और निर्माण की स्वीकृतियों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो।
अधिवक्ता नितेश शर्मा ने कहा कि केवल आवासीय भूमि उपयोग का दर्जा किसी होटल, रिसॉर्ट या अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान के संचालन की अनुमति नहीं देता।
निर्माण और उसका उपयोग संबंधित मास्टर प्लान, स्वीकृत भवन योजना तथा अन्य वैधानिक अनुमतियों के अनुरूप होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वर्ष 2005 में किया गया भूमि रूपांतरण पूरे भूखंड के लिए था या बड़ी संपत्ति के केवल एक हिस्से के लिए। यदि रूपांतरण केवल भूमि के एक हिस्से तक सीमित था तो शेष भूमि पर इसकी लागू होने की स्थिति आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर तय करनी होगी।
अधिकरण ने मौके का निरीक्षण कराने का निर्देश देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि वहां व्यावसायिक गतिविधि पाई जाती है तो जेडीए कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकता है।
यह मामला ऐसे समय में महत्वपूर्ण हो गया है, जब उच्चतम न्यायालय ने हाल में अनधिकृत निर्माण और स्वीकृत भूमि उपयोग के उल्लंघन के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई पर जोर दिया है।
पिछले सप्ताह उच्चतम न्यायालय ने जयपुर विकास अपीलीय अधिकरण को शहर में कथित अवैध निर्माण और अतिक्रमण से संबंधित लंबित अपीलों का दो सप्ताह के भीतर निपटारा करने का निर्देश दिया था। न्यायालय ने अनुपालन के लिए अधिकरण के पीठासीन अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार भी ठहराया था।
भाषा
बाकोलिया रवि कांत

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