रांची, 26 फरवरी (भाषा) झारखंड के मंत्री चमरा लिंडा ने बृहस्पतिवार को कहा कि राज्य सरकार आदिवासी उप-योजना (टीएसपी) निधि का अन्यत्र इस्तेमाल रोकने के लिए एक कानून बनाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इसका उपयोग केवल आदिवासी आबादी के लाभ के लिए ही किया जाए।
अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री ने झारखंड विधानसभा में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि राज्य में इस समय टीएसपी निधि की निगरानी के लिए कोई एजेंसी नहीं है, जिसके कारण कुछ विभागों द्वारा इसका ‘‘दुरुपयोग’’ किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे विभाग के अलावा, टीएसपी निधि अन्य विभागों को भी दी जाती है। इसके उपयोग का रिकॉर्ड केवल संबंधित विभागों के पास ही रहता है। लक्षित योजनाओं के लिए हमारे विभाग को दी गई निधि सुरक्षित है, लेकिन अन्य विभागों द्वारा निधि का ‘दुरुपयोग’ कर इसे गैर-अनुसूचित क्षेत्रों में अन्यत्र इस्तेमाल किए जाने के मामले सामने आए हैं।’’
मंत्री ने कहा कि राज्य झारखंड के लिए कानून बनाने के उद्देश्य से आंध्र प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के इसी तरह के कानूनों का अध्ययन करने की योजना बना रहा है।
टीएसपी निधि का उद्देश्य अनुसूचित जनजातियों और सामान्य आबादी के बीच सामाजिक-आर्थिक अंतर को पाटना, त्वरित विकास सुनिश्चित करना, गरीबी कम करना और शोषण से संरक्षण देना है।
कांग्रेस विधायक राजेश कच्छप ने प्रश्नकाल के दौरान टीएसपी निधि का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया था कि क्या इसे गैर-अनुसूचित क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जा रहा है।
भाषा सिम्मी माधव
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