केजरीवाल की याचिका पर आज साढ़े चार बजे फैसला सुनाएंगी न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा
केजरीवाल की याचिका पर आज साढ़े चार बजे फैसला सुनाएंगी न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा
नयी दिल्ली, 20 अप्रैल (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश स्वर्ण कांता शर्मा आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल और अन्य लोगों की उस याचिका पर सोमवार को अपराह्न साढ़े चार बजे फैसला सुनाएंगी जिसमें उनसे आबकारी नीति मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग करने का अनुरोध किया गया है।
न्यायमूर्ति शर्मा ने केजरीवाल की ओर से दायर अतिरिक्त दलीलों को रिकॉर्ड पर लेते हुए यह बात कही।
न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि हालांकि आदेश अपराह्न ढाई बजे सुनाया जाना था लेकिन वह इस मामले में केजरीवाल के प्रत्युत्तर को लिखित अभ्यावेदन के रूप में स्वीकार करते हुए ‘‘विशेष रियायत’’ दे रही हैं।
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये न्यायाधीश के समक्ष पेश हुए और उन्होंने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से दाखिल लिखित अभ्यावेदन पर उनके प्रत्युत्तर को रिकॉर्ड पर लेने का अनुरोध किया।
केजरीवाल ने कहा कि रजिस्ट्री द्वारा उनके प्रत्युत्तर को रिकॉर्ड पर लेने से इनकार किया जाना ‘‘न्याय का उल्लंघन’’ है। इस पर न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि चूंकि उनकी ओर से कोई वकील पेश नहीं हो रहा है इसलिए अदालत ने पिछले सप्ताह भी उनके लिए ‘‘विशेष रियायत’’ दी थी, जब सुनवाई से न्यायाधीश के अलग होने संबंधी याचिका पर आदेश सुरक्षित रखे जाने के बाद भी उन्हें अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने की अनुमति दी गई थी।
न्यायाधीश ने कहा कि रजिस्ट्री के नियम के अनुसार, अपना पक्ष स्वयं रख रहे किसी पक्षकार को कुछ भी दाखिल करने के लिए अदालत से अनुमति लेनी होती है और चूंकि यह मामला ‘‘असाधारण’’ नहीं है, इसलिए वही प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि कानून में विपक्षी पक्ष की लिखित दलीलों पर ‘‘प्रत्युत्तर’’ दाखिल करने की कोई व्यवस्था नहीं है, लेकिन वह केजरीवाल को उनकी दलीलें लिखित अभ्यावेदन के रूप में पेश करने की अनुमति देंगी ताकि उन्हें यह न लगे कि उनकी बात नहीं सुनी गई।
अदालत ने कहा, ‘‘आप कहते हैं कि आप मेरा सम्मान करते हैं। मेरे मन में हर पक्षकार के लिए सम्मान है। अदालत का नियम किसी के लिए नहीं बदला जाएगा, इसलिए मैं इसे लिखित अभ्यावेदन के रूप में स्वीकार करूंगी। मैं इसे रिकॉर्ड पर ले रही हूं। मैं केजरीवाल को यह रियायत दे रही हूं।’’
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से पेश हुए और उन्होंने प्रत्युत्तर दाखिल करने के केजरीवाल के अनुरोध का विरोध किया। मेहता ने कहा कि आदेश सुरक्षित रखे जाने के बाद देश में कहीं भी दलीलें रिकॉर्ड पर नहीं ली जातीं।
उन्होंने कहा कि लिखित दलील पर प्रत्युत्तर दाखिल करने की कोई व्यवस्था नहीं है और अदालत को वही करना चाहिए, जो वह किसी सामान्य पक्षकार के मामले में करती।
केजरीवाल ने सीबीआई की उस याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति शर्मा द्वारा किए जाने पर कई आपत्तियां उठाई थीं, जिसमें आबकारी नीति मामले में उन्हें आरोपमुक्त करने को चुनौती दी गई है। उन्होंने कहा था कि न्यायमूर्ति शर्मा उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर उन्हें राहत देने से पहले इनकार कर चुकी हैं और उन्होंने मनीष सिसोदिया एवं के. कविता सहित अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर भी उन्हें राहत नहीं दी थी।
उन्होंने यह भी दावा किया था कि न्यायमूर्ति शर्मा ने ‘‘कड़े और निर्णायक’’ निष्कर्ष दिए थे।
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने ‘‘हितों के सीधे टकराव’’ का भी आरोप लगाया और दावा किया कि न्यायमूर्ति शर्मा के बच्चे केंद्र सरकार के पैनल में शामिल वकील हैं जिन्हें सॉलिसिटर जनरल के माध्यम से काम मिलता है और इस मामले में सॉलिसिटर जनरल सीबीआई की ओर से पेश हो रहे हैं।
केजरीवाल के अलावा आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने भी न्यायाधीश के सुनवाई से अलग होने का अनुरोध करते हुए याचिकाएं दायर की थीं। विजय नायर और अरुण रामचंद्र पिल्लई समेत अन्य प्रतिवादियों ने भी न्यायमूर्ति शर्मा से सुनवाई से स्वयं को अलग करने का अनुरोध किया है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सीबीआई की ओर से पेश हुए और उन्होंने इस याचिका का विरोध किया। उन्होंने न्यायमूर्ति शर्मा से आग्रह किया कि वह न्यायाधीश से सुनवाई से अलग होने का अनुरोध करने पर केजरीवाल और अन्य के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करें।
मेहता ने कहा कि ये एक ‘‘अपरिपक्व दिमाग’’ की आशंकाएं हैं। उन्होंने कहा कि यह ‘‘संस्थागत सम्मान’’ का मामला है और न्यायमूर्ति शर्मा को दबाव के आगे नहीं झुकना चाहिए क्योंकि ‘‘बेबुनियाद आरोपों’’ पर सुनवाई से उनके अलग होने से गलत परंपरा शुरू होगी।
अधीनस्थ अदालत ने 27 फरवरी को दिल्ली आबकारी नीति मामले में केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य को आरोपमुक्त कर दिया था। अदालत ने कहा था कि सीबीआई का मामला न्यायिक जांच की कसौटी पर टिक नहीं पाया और पूरी तरह से निराधार साबित हुआ।
भाषा सिम्मी वैभव
वैभव

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