‘ग्लोबल वॉर्मिंग’ से निपटने के लिए कर्नाटक ने जलवायु कार्य योजना लागू की: मंत्री खांडरे

'ग्लोबल वॉर्मिंग' से निपटने के लिए कर्नाटक ने जलवायु कार्य योजना लागू की: मंत्री खांडरे

‘ग्लोबल वॉर्मिंग’ से निपटने के लिए कर्नाटक ने जलवायु कार्य योजना लागू की: मंत्री खांडरे
Modified Date: April 28, 2026 / 07:26 pm IST
Published Date: April 28, 2026 7:26 pm IST

बेंगलुरु, 28 अप्रैल (भाषा) कर्नाटक के वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री ईश्वर खांडरे ने मंगलवार को बताया कि ‘ग्लोबल वार्मिंग’ और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए ‘जलवायु परिवर्तन पर राज्य की कार्य योजना’ तैयार की गई है और इसके उचित कार्यान्वयन के लिए निर्देश जारी किए गए हैं।

पृथ्वी की सतह और वातावरण के औसत तापमान में होने वाली लगातार वृद्धि को ग्लोबल वार्मिंग कहते हैं।

कर्नाटक मीडिया अकादमी द्वारा बेंगलुरु पर भीषण गर्मी और उसके प्रभाव को लेकर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

संगोष्ठी की अध्यक्षता करने के बाद खांडरे ने पत्रकारों से कहा कि पर्यावरण विभाग के अंतर्गत आने वाले पर्यावरण प्रबंधन और नीति अनुसंधान संस्थान (ईएमपीआरआई) ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के समन्वय से कार्य योजना को लागू करने के लिए कदम उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन पर कर्नाटक राज्य की कार्य योजना के कार्यान्वयन और प्रगति के संबंध में जिला पंचायत कार्यालयों के सहयोग से जिला अधिकारियों और अन्य संबंधित संस्थानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

मंत्री ने कहा कि कर्नाटक के सभी 31 जिलों में ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

मंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, जलवायु अनुकूलन के संदर्भ में खांडरे ने कहा कि सर्वोत्तम प्रथाओं की जानकारी साझा करने के लिए अप्रैल 2025 में एक विशेष रेडियो कार्यक्रम ‘हवामाना मित्र’ (मौसम मित्र) शुरू किया गया था और आकाशवाणी पर अब तक 24 कार्यक्रम प्रसारित किए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का उद्देश्य जन जागरूकता पैदा करना है।

खांडरे ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक स्तर पर ‘ग्लोबल वार्मिंग’ और जलवायु परिवर्तन के कारण आज मौसम भी बदल रहे हैं।

उन्होंने कहा, “इस बात को ध्यान में रखते हुए वन मंत्री बनने के बाद से मैं हरित आवरण बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा हूं, खासकर बेंगलुरु शहर में।”

उन्होंने बताया कि जारकाबंदे क्षेत्र में 444 एकड़ भूमि भारतीय वायु सेना को आवंटित की गई थी। वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के तहत, उचित प्रक्रिया के बिना वन भूमि का हस्तांतरण नहीं किया जा सकता। इसलिए, 2017 में तत्कालीन उपायुक्त ने भूमि आवंटन रद्द कर दिया था।

उन्होंने कहा, “अब इस वन भूमि को पुनः प्राप्त करने और हरित क्षेत्र को संरक्षित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।”

भाषा

प्रचेता वैभव

वैभव


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