कश्मीर: सामान्य मरीजों के दिल की भी सर्जरी, चिकित्सक निलंबित

कश्मीर: सामान्य मरीजों के दिल की भी सर्जरी, चिकित्सक निलंबित

कश्मीर: सामान्य मरीजों के दिल की भी सर्जरी, चिकित्सक निलंबित
Modified Date: June 20, 2026 / 06:52 pm IST
Published Date: June 20, 2026 6:52 pm IST

श्रीनगर, 20 जून (भाषा) जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में बड़े पैमाने पर प्रक्रियागत अनियमितताओं के आरोपों की जांच में खुलासा हुआ कि जिन मरीजों के दिल की सर्जरी की गयी, उनमें से लगभग 50 प्रतिशत लोगों को वास्तव में इसकी जरूरत ही नहीं थी।

इस खुलासे के बाद शनिवार को चिकित्सक को निलंबित कर दिया गया।

जम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने बताया कि जांच में फर्जी बीमा दावे, मरीजों का शोषण और स्वस्थ मरीजों की अनावश्यक सर्जरी किए जाने के मामले सामने आए हैं।

विभाग ने अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सैयद मकबूल का नाम लेते हुए उन पर बड़े पैमाने पर प्रक्रियागत अनियमितताओं और आधिकारिक चिकित्सा रिकॉर्ड में हेरफेर करने के आरोप लगाए हैं।

यह मामला कथित पेसमेकर घोटाले से जुड़ा है, जिसमें 103 हृदय रोगी शामिल हैं। विशेषज्ञों की जांच में पाया गया कि जिन 55 मरीजों का पेसमेकर लगाया गया था, उनमें से 27 का हृदय सामान्य था और उन्हें पेसमेकर लगाने का कोई चिकित्सीय औचित्य नहीं था।

चिकित्सक के खिलाफ लगाए गए आरोपों में रिकॉर्ड में हेरफेर, प्रणाली स्तर पर धोखाधड़ी, मरीजों का शोषण, विक्रेताओं के साथ मिलीभगत, बिना अनुमति सर्जरी करना शामिल हैं।

एक स्वतंत्र विशेषज्ञ मूल्यांकन में सामने आया कि जिन 55 मरीजों की ‘लेफ्ट बंडल ब्रांच एरिया पेसिंग’ सर्जरी की गयी, उनमें से 27 मरीजों (49 प्रतिशत) को इसकी जरूरत नहीं थी।

ह्रदय रोग विशेषज्ञ को जारी नोटिस में आरोप लगाया गया कि बिना जरूरत के सर्जरी करना व्यक्तिगत लाभ के लिए मरीजों की सुरक्षा और पेशेवर नैतिकता की पूरी तरह अनदेखी को दर्शाता है।

दिसंबर 2025 में राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा संस्थान से ‘लेफ्ट बंडल ब्रांच एरिया पेसिंग’ से जुड़े दावों में असामान्य वृद्धि देखे जाने के बाद कराई गई विशेषज्ञ जांच के दौरान ये निष्कर्ष सामने आए।

मकबूल को एक सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने के लिए लिखित जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है और ऐसा नहीं करने पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

जांच में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना-सेहत योजना के लाभार्थियों के सीधे आर्थिक शोषण के आरोप सामने आए हैं।

निष्कर्षों में एक मामले का हवाला देते हुए बताया गया कि मरीज को एक निजी कंपनी को 70,000 रुपये देने के लिए मजबूर किया गया। जांच में सामने आया, “लाभार्थियों का यह आर्थिक शोषण गंभीर आपराधिक कदाचार है।”

जांच में आरोप लगाया गया कि अनिवार्य मंजूरियों, गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़े सुरक्षा उपायों और खरीद प्रक्रिया के नियमों की अनदेखी की गई।

स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त/सचिव एम. राजू द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, “अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में प्रतिनियुक्ति पर तैनात डॉ. सैयद मकबूल अहमद शाह, एसोसिएट प्रोफेसर (कार्डियोलॉजी) को उनके आचरण की जांच पूरी होने तक जम्मू-कश्मीर सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1956 के नियम 31 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।”

आदेश में बताया गया कि निलंबन की अवधि के दौरान चिकित्सक जम्मू स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के कार्यालय से संबद्ध रहेंगे। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री सकीना इट्टू ने कहा कि हृदय रोग विशेषज्ञ के खिलाफ कई शिकायतें मिलने के बाद यह जांच शुरू की गई थी।

इट्टू ने कुलगाम में पत्रकारों से कहा, “सरकार ने कई शिकायतें मिलने के बाद तथ्यों का पता लगाने के लिए जांच शुरू की थी। जांच के बाद जब कुछ निष्कर्ष सामने आए, तो हमने उन्हें (चिकित्सक को) निलंबित कर दिया। हमने उनसे अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है।”

उन्होंने कहा, “आज (शनिवार को) निलंबन का आदेश जारी किया गया है। मैं हर चिकित्सक से अपील करती हूं कि लोगों की जिंदगी के साथ कोई समझौता न करें। सरकार आपको वेतन देती है। यह नौकरी लोगों की सेवा और मरीजों की देखभाल के लिए है।”

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, “सरकार इस मामले पर नजर रख रही है। कार्रवाई की गयी है और जो भी आवश्यक होगा, वह किया जाएगा।”

सरकार ने जम्मू-कश्मीर सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1956 के तहत मकबूल के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू करने का प्रस्ताव किया है।

भाषा जितेंद्र अविनाश

अविनाश


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