अदालत में पेश हुए केजरीवाल, न्यायमूर्ति शर्मा से हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेने का आग्रह किया

अदालत में पेश हुए केजरीवाल, न्यायमूर्ति शर्मा से हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेने का आग्रह किया

अदालत में पेश हुए केजरीवाल, न्यायमूर्ति शर्मा से हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेने का आग्रह किया
Modified Date: April 16, 2026 / 04:46 pm IST
Published Date: April 16, 2026 4:46 pm IST

नयी दिल्ली, 16 अप्रैल (भाषा) आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने बृहस्पतिवार को दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा से उनके अतिरिक्त हलफनामे को रिकॉर्ड में लेने की अपील की।

केजरीवाल ने हलफनामे में दावा किया है कि शराब नीति मामले में उन्हें बरी किये जाने के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई जारी रखने को लेकर न्यायाधीश शर्मा का ‘प्रत्यक्ष रूप से हितों का टकराव’ है।

न्यायमूर्ति शर्मा ने रजिस्ट्री को पूर्व मुख्यमंत्री के हलफनामे को रिकॉर्ड में लेने का निर्देश दिया, साथ ही यह स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई से उनके अलग होने की मांग संबंधी केजरीवाल की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखने के बाद वह ‘मामले की सुनवाई दोबारा शुरू नहीं कर रही हैं’।

केजरीवाल वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अदालत में पेश हुए।

सीबीआई का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि एजेंसी अपना लिखित जवाब दाखिल करेगी।

केजरीवाल के अनुरोध पर अदालत ने केंद्रीय एजेंसी को अपने जवाबों की एक प्रति उन्हें देने को कहा।

न्यायाधीश ने स्पष्ट किया, “लेकिन यह मामला सुरक्षित है। मैं इसे दोबारा नहीं खोल रही हूं। सुरक्षित मामलों को दोबारा नहीं खोला जाता।”

केजरीवाल ने 14 अप्रैल के अपने अतिरिक्त हलफनामे में दावा किया कि न्यायाधीश के बच्चे केंद्र सरकार के सूचीबद्ध वकील हैं, जिन्हें सॉलिसिटर जनरल के माध्यम से काम मिलता है और वह सीबीआई की ओर से इस मामले में पेश हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इसमें ‘हितों का सीधा टकराव’ है, जिसने उनकी आशंका को और बढ़ा दिया है, इसलिए न्यायमूर्ति शर्मा के समक्ष मामले को अपने से अलग करने का आधार बनता है।

केजरीवाल ने अदालत में प्रस्तुत होकर दलील देने के लिए समय भी मांगा क्योंकि उन्हें आशंका है कि न्यायमूर्ति शर्मा के समक्ष मामले की सुनवाई जारी रहने से ‘‘कानून द्वारा अपेक्षित न्यायिक निष्पक्षता, स्वतंत्रता और तटस्थता’’ का पूर्ण स्वरूप बरकरार नहीं रह जाएगा।

केजरीवाल ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत प्राप्त जानकारी सहित सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दस्तावेजों पर भरोसा करते हुए आरोप लगाया कि न्यायमूर्ति शर्मा के बेटे को काफी कानूनी कार्य सौंपा गया था।

हलफनामे में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, आरटीआई के जवाब में बताया गया कि एक सोशल मीडिया पोस्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि वर्ष 2023 में न्यायमूर्ति शर्मा के बेटे को कुल 2,487 मामले, 2024 में 1,784 मामले और 2025 में 1,633 मामले सौंपे गए थे।

केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने इन ‘महत्वपूर्ण तथ्यों’ की जानकारी प्राप्त की और इस बात पर जोर दिया कि केंद्र सरकार द्वारा पैनल में शामिल करना मानद नहीं बल्कि इसमें अदालत में पेशी और वित्तीय लाभ शामिल हैं।

केजरीवाल ने 13 अप्रैल को सीबीआई की याचिका पर सुनवाई कर रहीं न्यायाधीश के खिलाफ कई आपत्तियां उठाईं।

इन आपत्तियों में यह भी शामिल है कि न्यायाधीश शर्मा ने पहले केजरीवाल की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर उन्हें, मनीष सिसोदिया और के कविता सहित अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर राहत देने से मना कर दिया था और ‘कठोर व निर्णायक’ निष्कर्ष भी दिए थे।

मेहता ने न्यायमूर्ति शर्मा को सुनवाई से अलग करने की याचिका का विरोध किया और केजरीवाल व अन्य लोगों के खिलाफ अवमानना ​​की कार्रवाई शुरू करने का आग्रह किया।

मेहता ने केजरीवाल और अन्य लोगों द्वारा उठाई गई चिंताओं को ‘अपरिपक्व आशंकाएं’ बताते हुए अदालत से कहा कि यह ‘संस्थागत सम्मान’ का मामला है और न्यायमूर्ति शर्मा को दबाव में नहीं आना चाहिए, क्योंकि ‘बेबुनियाद आरोपों’ पर उनका अलग होना एक गलत मिसाल कायम करेगा।

अदालत ने न्यायमूर्ति शर्मा को सुनवाई से अलग करने की याचिका पर 13 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

भाषा जितेंद्र अविनाश

अविनाश


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