केरल विस चुनाव के नतीजे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और एलडीएफ के कुशासन की हार: वेणुगोपाल
केरल विस चुनाव के नतीजे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और एलडीएफ के कुशासन की हार: वेणुगोपाल
अलप्पुझा (केरल), पांच मई (भाषा) कांग्रेस के महासचिव एवं मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में शुमार के.सी. वेणुगोपाल ने मंगलवार को कहा कि केरल विधानसभा चुनाव के नतीजे राज्य में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश कर रहीं ताकतों के लिए करारा जवाब हैं और यह दिखाते हैं कि जनता ने वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के पिछले एक दशक के “राजनीतिक अहंकार और कथित कुशासन” को भी नकार दिया है।
वेणुगोपाल ने पश्चिम बंगाल और असम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत को भी असली जनादेश मानने से इनकार कर दिया और आरोप लगाया कि ये जीत अनुचित तरीकों से हासिल की गईं, जिससे वहां किसी भी विपक्षी दल का जीतना लगभग नामुमकिन हो गया।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा पूरे देश में यही करना चाहती है और इसीलिए वह परिसीमन विधेयक लेकर आई, जिसे विपक्ष ने एकजुट होकर नकार दिया।
केरल के चुनाव परिणामों पर वेणुगोपाल ने कहा कि यह नतीजे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश कर रहे लोगों को कड़ा संदेश देते हैं कि यहां ऐसी राजनीति नहीं चलेगी।
उन्होंने कहा कि केरल का मतदाता बेहद परिपक्व है, वह जानता है कि किसे चुनना है और वह धर्म या जाति से ऊपर उठकर राज्य के हित व पार्टी की विचारधारा को प्राथमिकता देता है।
कांग्रेस नेता ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह राजनीतिक परिपक्वता उन उदाहरणों में साफ झलकती है, जहां तनूर से वी. एस. जॉय और कोच्चि से मोहम्मद शियास जैसे उम्मीदवारों को सभी धर्मों के मतदाताओं का व्यापक समर्थन मिला और उन्होंने उल्लेखनीय जीत दर्ज की।’’
उन्होंने कहा कि एलडीएफ का समर्थन करने वाले ‘एसएनडीपी योगम’ के महासचिव वेल्लापल्ली नटेशन जैसे नेताओं की सांप्रदायिक बयानबाजी को जनता ने सिरे से नकार दिया।
वेणुगोपाल ने कहा कि यह चुनाव परिणाम एलडीएफ के एक दशक लंबे ‘‘राजनीतिक अहंकार और कथित कुशासन’’ की भी हार है।
उन्होंने कहा, ‘‘मार्क्सवादी पार्टी को यह समझना होगा कि उसका रास्ता गलत था और उसे उसे सुधारने के लिए तैयार रहना होगा।’’
मुख्यमंत्री पद के बारे में पूछे जाने पर वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस के पास इसके लिए एक स्थापित आंतरिक प्रक्रिया है और जल्द ही फैसला कर लिया जाएगा।
निर्वाचन आयोग के अनुसार, विधानसभा की 140 सीट में से यूडीएफ ने 102 जीती हैं, जबकि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नीत एलडीएफ को महज 35 सीट पर संतोष करना पड़ा।
भाषा
खारी मनीषा
मनीषा

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