केरल: पुथुपल्ली में चांडी की विरासत की होगी परीक्षा, बेटे को करना होगा त्रिकोणीय मुकाबले का सामना

केरल: पुथुपल्ली में चांडी की विरासत की होगी परीक्षा, बेटे को करना होगा त्रिकोणीय मुकाबले का सामना

केरल: पुथुपल्ली में चांडी की विरासत की होगी परीक्षा, बेटे को करना होगा त्रिकोणीय मुकाबले का सामना
Modified Date: March 23, 2026 / 12:55 pm IST
Published Date: March 23, 2026 12:55 pm IST

(एलिजाबेथ कुरियन)

कोट्टायम (केरल), 23 मार्च (भाषा) केरल में पांच दशक से अधिक समय बाद पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता ओमन चांडी की गैर-मौजूदगी में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। चांडी का उनके निर्वाचन क्षेत्र पुथुपल्ली और राज्य की राजनीति में काफी प्रभाव था।

चांडी की अनुपस्थिति केवल चुनावों के समय ही नहीं खल रही है बल्कि मध्य केरल के उनके निर्वाचन क्षेत्र में कई लोगों के लिए उनका जाना निजी क्षति भी है।

पूर्व मुख्यमंत्री के निधन के तीन साल बाद भी उनके पैतृक आवास के पास स्थित सेंट जॉर्ज ऑर्थोडॉक्स चर्च में उनकी कब्र पर लोग आते हैं और शांतिपूर्वक प्रार्थना करते हैं। यह उनके और आम लोगों के बीच के गहरे संबंध का प्रमाण है।

कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ इस भावनात्मक जुड़ाव को आधार बनाकर मतदाताओं से गठबंधन को वोट देने की अपील कर रहा है।

चांडी के निधन के बाद हुए उपचुनाव में उनके पुत्र चांडी ओमन ने पिता की विरासत को बरकरार रखते हुए पुथुपल्ली से जीत हासिल की थी।

केरल में नौ अप्रैल को होने वाले चुनाव के मद्देनजर चांडी ओमन संयुक्त लोकतांत्रिक गठबंधन (यूडीएफ) उम्मीदवार के रूप में बदलाव के बजाय निरंतरता की बात कर रहे हैं।

लेकिन उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के उम्मीदवार के. एस. राधाकृष्णन कहते हैं कि इस बार चांडी परिवार के लिए यह आसान नहीं होगा।

साल 2023 के उपचुनाव में पुथुपल्ली के लोगों ने ओमन चांडी के लिए सहानुभूति और स्नेह दिखाते हुए उनके बेटे को 37,000 से अधिक मतों के अंतर से जीत दिलाई थी। इससे पहले साल 2021 के विधानसभा चुनावे में पूर्व मुख्यमंत्री ने लगभग नौ हजार वोट से जीत हासिल की थी।

चांडी ओमन यह दिखाने के लिए दृढ़ हैं कि उन्हें केवल सहानुभूतिपूर्वक डाले गए मतों से जीत नहीं मिली थी। इस विश्वास को दिखाने के लिए उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र में एक भी ‘फ्लेक्स बोर्ड’ या पोस्टर लगाए बिना प्रचार करने का निर्णय लिया है।

चांडी ओमन ने कहा, “पुथुपल्ली में सभी बुनियादी ढांचे मौजूद हैं। 53 साल तक विधायक रहे मेरे पिता ने पुथुपल्ली के कोने-कोने का विकास किया। यहां 60 से अधिक बड़े और छोटे पुल हैं। यहां एलकेजी से एम टेक तक पढ़ाई की जा सकती है।”

उन्होंने कहा, “अब हमें अगले स्तर पर जाना है। इसमें खेल सुविधाओं का विकास और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना शामिल है।”

वहीं, एलडीएफ उम्मीदवार राधाकृष्णन पहली बार चुनाव लड़ेंगे।

उन्होंने कहा, “पिछले 55 वर्षों से यूडीएफ को इस सीट पर लगातार जीत मिलती रही है। वर्तमान विधायक और उनके पिता ने इस निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है।”

राधाकृष्णन ने कहा, “उन्होंने (चांडी) मुख्यमंत्री के रूप में सेवा की और मंत्री भी रहे। लेकिन इसके बावजूद, पिछले 55 वर्षों में पुथुपल्ली का विकास केरल के कुल विकास की तुलना में धीमा रहा है। यह गंभीर चिंता का विषय है।”

उन्होंने कहा, “पिछले स्थानीय निकाय चुनावों में एलडीएफ और यूडीएफ के बीच अंतर लगभग 14,000 मतों का था। पिछले तीन वर्षों में वर्तमान विधायक ने निर्वाचन क्षेत्र में किसी बड़े विकास कार्य में पहल नहीं की।’’

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी चुनाव में जोर आजमा रही है, जिससे यह त्रिकोणीय मुकाबला हो गया है। पार्टी ने रवींद्रनाथ वकठानम को उम्मीदवार बनाया है, जो पिछले 30 वर्षों से पार्टी के कार्यकर्ता हैं। रवींद्रनाथ कहते हैं कि निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा का बढ़ता प्रभाव स्पष्ट है और लोग विकास चाहते हैं।

रवींद्रनाथ ने कहा, “यहां निश्चित रूप से भाजपा का प्रभाव है। पिछले 12 वर्ष से केंद्र में भाजपा की सरकार है और विकास कई राज्यों तक पहुंचा है। लेकिन केरल में ऐसा नहीं हो पाया। केरल के लोग वैसा विकास चाहते हैं, और यही आकांक्षा भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के समर्थन को बढ़ा रही है।”

पुथुपल्ली विधानसभा में 2021 के चुनावों में लगभग 74.8 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस निर्वाचन क्षेत्र में ईसाई आबादी की अच्छी खासी संख्या है, विशेष रूप से सीरियाई ईसाई, जो पारंपरिक रूप से यूडीएफ का समर्थन करता रहा है।

भाषा जोहेब गोला

गोला


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