केरल: माकपा विधायक रियास ने सरकार पर केंद्र की नीतियों का अनुसरण करने का आरोप लगाया
केरल: माकपा विधायक रियास ने सरकार पर केंद्र की नीतियों का अनुसरण करने का आरोप लगाया
तिरुवनंतपुरम, छह जून (भाषा) केरल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के विधायक पीए मोहम्मद रियास ने शनिवार को आरोप लगाया कि राज्य सरकार, केंद्र सरकार की तरह ही नव उदारवादी नीतियों का पालन कर रही है।
उन्होंने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राज्य में केंद्र सरकार के प्रभाव में चलने वाला एक सत्तारूढ़ मोर्चा बनाने की कोशिश कर रही है।
रियास ने ‘फेसबुक’ पर एक पोस्ट में विधानसभा में मुख्यमंत्री वीडी सतीशन द्वारा प्रस्तुत श्वेत पत्र की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि इसे ‘नव उदारवादी कॉरपोरेट आर्थिक तर्कों’ के अनुसार तैयार किया गया है और इसमें जानबूझकर केरल के प्रति केंद्र सरकार की कथित उपेक्षा की आलोचना से परहेज किया गया है।
उन्होंने दावा किया कि इस दस्तावेज में स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली और दुर्लभ खनिज सहित विभिन्न क्षेत्रों व सार्वजनिक संपत्तियों के निजीकरण के उद्देश्य से प्रस्ताव शामिल किए गए हैं।
विधायक ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में हिस्सेदारी बेचने जैसी सिफारिशों पर पहले ही विरोध शुरू हो चुका है।
माकपा नेता ने सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने और वेतन संशोधन के बीच का अंतराल बढ़ाकर 10 वर्ष करने के प्रस्तावों की भी आलोचना की तथा सेवानिवृत्ति आयु संबंधी प्रस्ताव को ‘युवाओं के खिलाफ युद्ध की घोषणा’ बताया।
रियास ने कहा कि उन्होंने विधानसभा में पहले ही चेतावनी दी थी कि जब भी केंद्र और राज्य दोनों ने एक जैसी नव उदारवादी व कॉरपोरेट-उन्मुख नीतियां अपनाई हैं, केरल को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।
उन्होंने भाजपा के राज्य नेतृत्व द्वारा श्वेत पत्र के समर्थन का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि इसे भाजपा द्वारा राज्य की सत्ताधारी पार्टी को प्रभावित करने के प्रयासों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
रियास ने पोस्ट में कहा, “जिस प्रकार पश्चिम बंगाल में राज्य सरकार द्वारा नियंत्रित विपक्ष का गठन हुआ, उसी प्रकार भाजपा केरल में केंद्र सरकार के नियंत्रण में एक सत्तारूढ़ मोर्चा बना रही है।”
उन्होंने कहा कि विपक्ष के तौर पर वाम लोकतांत्रिक मोर्चा नव निर्वाचित सरकार के हर फैसले का सिर्फ विरोध नहीं करेगा बल्कि उन नीतियों और दृष्टिकोणों का भी कड़ा विरोध करेगा, जिन्हें वह जनविरोधी मानता है।
भाषा जितेंद्र संतोष
संतोष

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