केरल चुनाव: त्रिशूर में अवैध किट वितरण; पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की

केरल चुनाव: त्रिशूर में अवैध किट वितरण; पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की

केरल चुनाव: त्रिशूर में अवैध किट वितरण; पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की
Modified Date: April 5, 2026 / 02:47 pm IST
Published Date: April 5, 2026 2:47 pm IST

त्रिशूर, पांच अप्रैल (भाषा) त्रिशूर पुलिस ने शहर के कुछ हिस्सों में चार अप्रैल को अवैध तरीके से घरेलू सामान की किट वितरित करने के मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। निर्वाचन आयोग ने रविवार को यह जानकारी दी।

आयोग के एक बयान में कहा कि ओलारी पार्थसारथी मंदिर और कार्तिका सुपर मार्केट के पास घरेलू सामान की किट के अनधिकृत वितरण को रोकने के बाद चुनावी नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करने वाले दस्ते ने मामला दर्ज किया।

यह मामला केरल में नौ अप्रैल के लिए निर्धारित विधानसभा चुनावों से कुछ ही दिन पहले सामने आया है।

त्रिशूर से संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) और वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के उम्मीदवार राजन पल्लन और अलनकोड लीलाकृष्णन ने किट वितरण के पीछे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का हाथ होने का आरोप लगाया।

पल्लन ने यहां एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा कि भाजपा कथित तौर पर मतदाताओं को लुभाने के लिए खाद्य किट और बार से शराब लेने के लिए कूपन बांट रही है तथा उन्होंने इस मामले की व्यापक जांच की मांग की।

लीलाकृष्णन ने इस घटना को ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण’’ बताते हुए कहा कि उनकी पार्टी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और एलडीएफ कानूनी उपायों सहित आवश्यक कदम उठाएंगे।

उन्होंने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा, ‘‘धनबल के जोर पर लोकतंत्र को छीनना उचित नहीं है। ऐसे किसी भी प्रयास से निर्वाचन आयोग को निपटना होगा।’

इस बीच, भाजपा उम्मीदवार पद्मजा वेणुगोपाल ने घटना के संबंध में किसी भी प्रकार की जानकारी होने से इनकार किया।

कार्यकारी मजिस्ट्रेट डॉ. बिंदू टी एन की देखरेख में काम कर रही प्रवर्तन टीम ने पाया कि लगभग 900 रुपये मूल्य की 26 किट वितरित की जा रही थी, जिनमें विभिन्न प्रकार के घरेलू सामान थे।

निर्वाचन आयोन ने कहा, ‘‘मौके पर गई जांच से पता चला कि वितरण राधाकृष्णन नामक व्यक्ति के कहने पर किया गया था, और यह भी पता चला कि अधिकारियों के पहुंचने से पहले ही 75 किट वितरित की जा चुकी थी।’’

निर्वाचन आयोग ने कहा कि ऐसा करना भारतीय न्याय संहिता की धारा 170(1)(i)(चुनाव के दौरान रिश्वतखोरी) और 173 (रिश्वतखोरी के लिए सजा) तथा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123(ए)(1)(भ्रष्ट आचरण) के तहत अपराध है।

बयान में कहा गया कि चूंकि ये अपराध असंज्ञेय श्रेणी में आते हैं, इसलिए औपचारिक कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाने से पहले संबंधित क्षेत्राधिकार के मजिस्ट्रेट से आवश्यक पूर्व अनुमति प्राप्त कर ली गई।

भाषा तान्या खारी

खारी


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