केरल सरकार सुनिश्चित करे कि मेडिकल कॉलेजों में ओपीडी और स्वास्थ्य सेवाएं बाधित न हों : अदालत

केरल सरकार सुनिश्चित करे कि मेडिकल कॉलेजों में ओपीडी और स्वास्थ्य सेवाएं बाधित न हों : अदालत

केरल सरकार सुनिश्चित करे कि मेडिकल कॉलेजों में ओपीडी और स्वास्थ्य सेवाएं बाधित न हों : अदालत
Modified Date: March 5, 2026 / 06:50 pm IST
Published Date: March 5, 2026 6:50 pm IST

कोच्चि, पांच मार्च (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने का बृहस्पतिवार को निर्देश दिया कि उसके द्वारा संचालित मेडिकल कॉलेजों में बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं बाधित न हों।

मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी एम की पीठ ने यह निर्देश जारी करते हुए कहा कि चिकित्सा सेवाएं आवश्यक सेवाएं हैं और सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने की आवश्यकता है कि वे सुचारू और निर्बाध रूप से जारी रहें।

अपने निर्देशों के साथ, न्यायालय ने अधिवक्ता अजीश कलाथिल गोपी द्वारा केरल सरकार मेडिकल कॉलेज शिक्षक संघ (केजीएमसीटीए) द्वारा की जा रही हड़ताल के विरुद्ध दायर जनहित याचिका (पीआईएल) का निपटारा कर दिया।

सरकार ने सुनवाई के दौरान दावा किया कि केजीएमसीटीए ने अपनी हड़ताल वापस ले ली है, लेकिन गोपी ने दलील दी कि इसे केवल स्थगित किया गया था।

उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि चिकित्सा सेवाएं एक आवश्यक सेवा हैं और इसलिए, डॉक्टर हड़ताल पर जाकर लोगों को बंधक नहीं बना सकते।

अपनी याचिका में उन्होंने दावा किया था कि केजीएमसीटीए की हड़ताल के कारण राज्यभर के मेडिकल कॉलेजों में आवश्यक सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में काफी व्यवधान उत्पन्न हुआ है।

उन्होंने राज्यभर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में ओपीडी और सभी आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के निर्बाध संचालन को सुनिश्चित करने के लिए अदालत से निर्देश देने का भी अनुरोध किया।

याचिका में राज्य सरकार को तत्काल और प्रभावी उपाय करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है, जिसमें जरूरत पड़ने पर केरल आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम, 1994 के तहत वैधानिक शक्तियों का प्रयोग करना भी शामिल है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं बाधित न हों।

भाषा देवेंद्र रंजन

रंजन


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