केरल उच्च न्यायालय ने सरकार की उपलब्धियों के प्रचार संबंधी मामले में सुनवाई दो मार्च तक टाली

केरल उच्च न्यायालय ने सरकार की उपलब्धियों के प्रचार संबंधी मामले में सुनवाई दो मार्च तक टाली

केरल उच्च न्यायालय ने सरकार की उपलब्धियों के प्रचार संबंधी मामले में सुनवाई दो मार्च तक टाली
Modified Date: February 27, 2026 / 03:25 pm IST
Published Date: February 27, 2026 3:25 pm IST

कोच्चि, 27 फरवरी (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को राज्य सरकार की उपलब्धियों के संदेश भेजने से जुड़े मामले में सुनवाई दो मार्च के लिए स्थगित कर दी।

न्यायमूर्ति बी. कुरियन थॉमस ने सुनवाई राज्य सरकार की ओर से दिये गए आश्वासन के बाद टाल दी जिसमें कहा गया था कि सरकार की उपलब्धियों को उजागर करने वाले किसी भी संदेश का प्रसार नहीं किया जाएगा।

सरकार के वकीलों ने पूर्व में दिये गए आश्वासन की मियाद बढ़ाने पर सहमति जताते हुए कहा कि यह केवल केरल के लिए सेवा और वेतन प्रशासनिक कोषागार भंडार (एसपीएआरके) से प्राप्त आंकड़ों पर लागू होगा, किसी अन्य स्रोत पर नहीं।

सरकार ने याचिकाकर्ताओं के वकीलों द्वारा केएसएमएआरटी (केरल सॉल्यूशंस फॉर मैनेजिंग एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्मेशन एंड ट्रांसफॉर्मेशन) प्रणाली से प्राप्त आंकड़ों से संबंधित अतिरिक्त दस्तावेज अदालत में दाखिल किये जाने के बाद सहमति जताई। याचिकाकर्ताओं में मलप्पुरम स्थित एक महाविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर रशीद अहमद और तिरुवनंतपुरम के सचिवालय में सहायक लिपिक अनिल कुमार के एम शामिल हैं।

अदालत ने मंगलवार को टिप्पणी की थी कि राज्य सरकार की उपलब्धियों के संबंध में अधिकारियों को कथित तौर पर मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) द्वारा भेजे गए ईमेल और संदेश निजता का उल्लंघन थे।

याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में दावा किया है कि इस तरह के संदेश भेजना चुनावी अभियान के समान है।

राज्य सरकार ने इससे पहले अदालत को बताया था कि ये संदेश सीएमओ द्वारा नहीं भेजे गए थे।

सरकारी वकील ने कहा कि ये संदेश ‘डेटा प्रिंसिपल’ द्वारा प्रसारित किए गए थे, जो इस मामले में केरल राज्य सूचना प्रौद्योगिकी मिशन है।

याचिकाकर्ताओं का दावा है कि वे मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) द्वारा चलाए गए सामूहिक संदेश अभियान से पीड़ित हैं, जिसका कथित लक्ष्य विधानसभा चुनावों से पूर्व राज्य सरकार के कर्मचारियों और विभिन्न योजनाओं के तहत वेतन और लाभ प्राप्त करने वाले अन्य लोगों को लक्षित करना है।

उनके अनुसार संदेश भेजने के लिए उनके मासिक वेतन और लाभों के भुगतान की सूचना सहित उनकी निजी जानकारी तक पहुंच प्राप्त की गई थी।

एसपीएआरके केरल के वित्त विभाग के अंतर्गत एक ई-गवर्नेंस पहल है, जो 2007 से कार्यरत है और इसका उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों की जानकारी का डिजिटलीकरण करना है।

भाषा

धीरज अविनाश

अविनाश


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