केरल उच्च न्यायालय ने ईडी अधिकारियों पर हमला मामले में छह और आरोपियों को जमानत दी
केरल उच्च न्यायालय ने ईडी अधिकारियों पर हमला मामले में छह और आरोपियों को जमानत दी
कोच्चि, छह अगस्त (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने इस साल मई में पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के आवास पर छापेमारी के लिए गए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों पर हमला करने के आरोपी छह और लोगों को जमानत दे दी है।
उच्च न्यायालय ने मामले में रेवंत, आर. उन्नीकृष्णन, उन्नी डी.एस., आई.पी. बीनू, डी. बी. नायर और दिनकर को जमानत दे दी। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष के अनुसार जांच लगभग पूरी हो चुकी है, आरोपियों का कोई गंभीर अपराध का पिछला रिकॉर्ड नहीं है और पीड़ितों को कोई गंभीर चोट नहीं आई।
वहीं, न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागाथ ने कहा कि केस डायरी देखने से पता चलता है कि चारों पर लगे आरोप बहुत गंभीर हैं और (प्रथम दृष्टया) ये उनकी ओर से पहले से सोच-समझ कर किए गए आपराधिक कृत्य का संकेत हैं।
उच्च न्यायालय ने इस हफ्ते की शुरुआत में मामले में 17 अन्य आरोपियों को भी जमानत दी थी और इनमें से एक आरोपी को अधीनस्थ अदालत से जमानत मिली थी।
इस मामले में छह और लोगों को जमानत मिलने के साथ ही अबतक 24 आरोपियों को राहत मिल गई है। इस मामले में पुलिस ने 300 चिह्नित आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
ईडी के अनुसार इनमें से कई आरोपियों की अभी पहचान नहीं हो पाई है या वे फरार हैं।
अदालत ने आरोपियों को एक-एक लाख रुपये की जमानत राशि और इतनी ही राशि के दो मुचलके जमा करने के बाद जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
अदालत ने कई शर्तें भी लगाईं और कहा कि आरोपियों को जांच में पूरा सहयोग करना होगा, हर शनिवार सुबह 10 बजे से 11 बजे के बीच और जरूरत पड़ने पर भी जांच अधिकारी के सामने पेश होना होगा। साथ ही, तिरुवनंतपुरम के छावनी थाना क्षेत्र में जाने से बचना होगा और संबंधित मजिस्ट्रेट अदालत में प्रत्येक को 10-10 हजार रुपये जमा करने होंगे।
अदालत ने उन्हें यह भी निर्देश दिया कि जमानत पर रहने के दौरान वे इस तरह का कोई अपराध न करें, अभियोजन पक्ष के गवाहों से किसी भी तरह से संपर्क न करें, उन्हें प्रभावित या डराएं-धमकाएं नहीं, और अधीनस्थ अदालत की अनुमति के बिना राज्य से बाहर न जाएं।
ईडी ने जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि 27 मई को उसके अधिकारियों पर हुए हमले को सामान्य कानून-व्यवस्था की घटना या अचानक हुआ जन-विरोध नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह हमला कई घंटों तक चली छापेमारी की कार्रवाई के बाद हुआ था।
ईडी की यह कार्रवाई विजयन की बेटी की कंपनी और रेत खनन कंपनी कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) के बीच हुए वित्तीय लेन-देन से जुड़ी थी।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि विजयन की बेटी टी. वीना और उनकी कंपनी ‘एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस’ को सीएमआरएल से 2017 और 2020 के बीच आईटी और कंसल्टेंसी सेवाओं के लिए भुगतान मिला था, जबकि कथित तौर पर ये सेवाएं कभी दी ही नहीं गईं।
वीना और सीएमआरएल ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है और कहा है कि ये भुगतान एक वैध व्यावसायिक समझौते का हिस्सा थे।
ईडी के अनुसार, जब उसके अधिकारी तलाशी के बाद लौट रहे थे तो एक भीड़ ने उनकी गाड़ियों पर हमला कर दिया, जिसमें कथित तौर पर एक ड्राइवर, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) का एक अधिकारी और तलाशी टीम का एक सदस्य घायल हो गया।
जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए वकील जयशंकर वी. नायर के माध्यम से दाखिल हलफनामे में ईडी ने कहा कि इन आरोपों से पता चलता है कि ‘‘धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मिले कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए छापेमारी की कार्रवाई कर रहे केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकारियों पर सुनियोजित और संगठित हमला किया गया था।’’
एजेंसी ने आरोप लगाया कि यह एक ‘‘हिंसक, पहले से तय और राजनीतिक रूप से सुनियोजित हमला’’ था, जिसमें खतरनाक हथियारों का इस्तेमाल किया गया था।
भाषा सुरभि सुरेश
सुरेश

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