केरलम की मंत्री, माकपा नेता ने महिलाओं पर टिप्पणी को लेकर कंथापुरम की आलोचना की
केरलम की मंत्री, माकपा नेता ने महिलाओं पर टिप्पणी को लेकर कंथापुरम की आलोचना की
तिरूवनंतपुरम, 31 अगस्त (भाषा) केरलम की महिला एवं बाल विकास मंत्री बिंदु कृष्णा और वरिष्ठ माकपा नेता पी.के. श्रीमती ने सोमवार को इस्लामी विद्वान कंथापुरम ए.पी. अबूबकर मुसलियार की इस टिप्पणी की आलोचना की कि महिलाओं को घर के अंदर ही रहना चाहिए।
रविवार को कोच्चि में एक इस्लामी सम्मेलन में कंथापुरम ने कहा था कि महिलाओं को सार्वजनिक मंचों पर लाने से ‘‘भारी तबाही’’ होगी और इस्लाम में इसे रोकने के वास्ते महिलाओं के लिए पर्दा करने का नियम है।
उन्होंने कहा था, ‘‘इस बात को ध्यान में रखते हुए कि महिलाओं को इस तरह सार्वजनिक मंचों पर लाने से भारी नुकसान होता है, इस्लाम ने महिलाओं के लिए पर्दा अनिवार्य किया है। कुरान में कहा गया है कि महिलाओं को अपने घरों के भीतर ही रहना चाहिए और सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आना चाहिए।’’
इन टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कृष्णा ने कहा कि ऐसे नजरिए का अनुकरण केरल, देश या दुनिया नहीं कर सकती।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारा देश भारतीय संविधान के मूल्यों के अनुरूप कानूनी रूप से आगे बढ़ने वाला देश है। इस देश में सभी धर्मों के लोग अपने धर्म का पालन कर सकते हैं। सभी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी है।’’
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘लेकिन इस देश में संविधान लैंगिक आधार पर भेदभाव किए बिना सभी लोगों को समान मानता है। यह देश लैंगिक न्याय का समर्थन करता है।’’
कृष्णा ने कहा कि देश की महिलाओं ने एक मुश्किल दौर देखा है और समाज के प्रगतिशील वर्गों के लगातार संघर्षों के जरिए वे मुख्यधारा में शामिल हुई हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘उस समय से लेकर आज तक, प्रगतिशील भाई-बहनों — जिनमें नवजागरण के नेता भी शामिल थे — के लगातार संघर्षों की बदौलत ही महिलाएं मुख्यधारा तक पहुंच पाई हैं।’’
ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वूमंस एसोसिएशन की प्रमुख नेता श्रीमती ने सवाल किया कि क्या महिलाओं को भारत के नागरिक के तौर पर उनके अधिकारों से वंचित किया जा सकता है?
उन्होंने पूछा, ‘‘क्या महिलाएं भारत की नागरिक नहीं हैं?’’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बाकी सभी नागरिकों की तरह महिलाओं को भी संविधान से मिले अधिकार पाने का हक है।
माकपा की वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘भारत की नागरिक होने के नाते भारतीय महिलाओं के कुछ अधिकार हैं – मौलिक अधिकार: कहीं भी आने-जाने का अधिकार, बोलने का अधिकार, अपनी पसंद के कपड़े पहनने का अधिकार, और साथ ही बुनियादी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा का अधिकार – ये सभी मौलिक अधिकार हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘किसी को भी यह कहने का अधिकार नहीं है कि ये बुनियादी अधिकार किसी को नहीं दिए जा सकते, क्योंकि यह उनका रिवाज है या किसी खास धार्मिक समूह की परंपरा है। यह संविधान का अनादर है।’’
उनके अनुसार, इस्लामी विद्वान की बातें ‘‘महिलाओं के लिए अपमानजनक हैं।’’
मलप्पुरम समेत केरल के स्कूलों में ओणम उत्सव मनाये जाने का जिक्र करते हुए माकपा नेता ने कहा कि अलग-अलग समुदायों की लड़कियों ने नृत्य और अन्य कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।
उन्होंने कहा, ‘‘उच्च माध्यमिक विद्यालयों और व्यावसायिक उच्च माध्यमिक विद्यालयों में, मुस्लिम लड़कियों और सभी धर्मों की लड़कियों ने ओणम उत्सव के तहत नृत्य किया और गीत गाए।’’
भाषा सुभाष नरेश
नरेश

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