केरल ने नशे की समस्या से निपटने के लिए दक्षिण के अन्य राज्यों से सहयोग मांगा : चेन्निथला

केरल ने नशे की समस्या से निपटने के लिए दक्षिण के अन्य राज्यों से सहयोग मांगा : चेन्निथला

केरल ने नशे की समस्या से निपटने के लिए दक्षिण के अन्य राज्यों से सहयोग मांगा : चेन्निथला
Modified Date: June 23, 2026 / 04:37 pm IST
Published Date: June 23, 2026 4:37 pm IST

तिरुवनंतपुरम, 23 जून (भाषा) केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार नशे की समस्या से निपटने के लिए दक्षिण के अन्य राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों की मदद लेने सहित कई कदम उठा रही है।

विधानसभा में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाए जाने पर गृह मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार केंद्र से स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस) में संशोधन करने का आग्रह करेगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छोटी मात्रा में मादक पदार्थ के साथ पकड़े जाने वाले लोग भी आसानी से जमानत न पा सकें और उन्हें सख्त सजा मिले।

चेन्निथला ने सदन को बताया कि मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने दक्षिण के अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर इस मामले में सहयोग मांगा है। इस पत्र में विस्तार से बताया गया है कि किस तरह केरल में प्रतिबंधित नशीले पदार्थ लाए जा रहे हैं।

इसके अलावा, राज्य पुलिस प्रमुख ने भी अन्य राज्यों के पुलिस प्रमुख के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की है। गृह मंत्री ने खुद नौसेना, सीमा शुल्क और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल जैसी केंद्रीय एजेंसियों और बलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की है और उनसे इस खतरे से निपटने में सहायता मांगी है।

गृह मंत्री ने कहा कि मादक पदार्थ तस्करी के पीछे अंतरराष्ट्रीय माफिया सक्रिय है, जो पुलिस का ध्यान भटकाने और मादक पदार्थों की तस्करी के लिए शातिर तरीके अपनाता है।

इस मुद्दे पर विधानसभा अध्यक्ष टी. राधाकृष्णन ने भी मंत्री और सरकार से आग्रह किया कि वे केंद्र के सामने संबंधित अधिनियम में संशोधन की मांग पुरजोर तरीके से उठाएं। राधाकृष्णन ने कहा कि मौजूदा एनडीपीएस कानून में कुछ कमियां हैं जिन्हें दूर करना बेहद जरूरी है, क्योंकि केरल इस खतरे से गंभीर रूप से प्रभावित है।

चेन्निथला ने सदन और विधानसभा अध्यक्ष को भरोसा दिलाया कि इस मुद्दे पर सांसदों की अगली बैठक में चर्चा की जाएगी ताकि वे संसद में इस मामले को उठा सकें और कानून में संशोधन के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बना सकें।

मंत्री ने बताया कि जब उन्होंने केंद्र के सामने यह मामला उठाया था, तब उन्हें बताया गया कि कुछ दवाओं में इन पदार्थों की कम मात्रा की आवश्यकता होती है और यही कारण है कि कम मात्रा में इन्हें रखने को बहुत गंभीर अपराध नहीं माना गया है।

भाषा खारी अविनाश

अविनाश


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