खादर ने विधायक के रूप में जीवराज के शपथ ग्रहण में ‘देरी’ के भाजपा के आरोपों को खारिज किया

खादर ने विधायक के रूप में जीवराज के शपथ ग्रहण में ‘देरी’ के भाजपा के आरोपों को खारिज किया

खादर ने विधायक के रूप में जीवराज के शपथ ग्रहण में ‘देरी’ के भाजपा के आरोपों को खारिज किया
Modified Date: May 6, 2026 / 02:57 pm IST
Published Date: May 6, 2026 2:57 pm IST

बेंगलुरु, छह मई (भाषा) कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष यू. टी. खादर ने बुधवार को विपक्षी भाजपा के डी. एन. जीवराज को विधायक के रूप में शपथ दिलाने में देरी के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया संविधान और नियमों के अनुसार ही संचालित की जा रही है।

भाजपा उम्मीदवार जीवराज 2023 के शृंगेरी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेता टी. डी. राजे गौड़ा से हार गए थे। उन्हें उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में डाक मतपत्रों की पुनर्गणना के बाद रविवार देर रात विजयी घोषित किया गया।

पुनर्गणना में गौड़ा के कुल मतों में से 255 वोट कम हो गए, जिससे उनकी पहले की 201 मतों की जीत का अंतर समाप्त हो गया और परिणाम पलट गया। यह पुनर्गणना जीवराज द्वारा दायर चुनाव याचिका के बाद करायी गयी थी।

खादर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जीवराज को शपथ दिलाने में कोई देरी नहीं हुई है।

उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए कहा, ‘‘देरी कहां हुई? आवेदन पूर्वाह्न 11 बजे दिया गया। अगर सुबह आवेदन दिया जाए और शाम तक कोई कहे कि देरी हो गई, तो यह कैसे देरी हुई?’’

अध्यक्ष ने बताया कि इस मामले में कुछ ‘तकनीकी मुद्दे’ हैं, जिनकी जांच के बाद ही शपथ ग्रहण की तारीख तय की जाएगी।

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे मामलों में हमें नियमों के अनुसार निर्णय लेना होता है। आवेदन सुबह दिया जाए तो कम से कम 24 घंटे का समय देना जरूरी है।’’

खादर ने कहा कि उनका दायित्व संविधान से बंधा हुआ है और वह किसी राजनीतिक दबाव में काम नहीं कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘जब कोई निर्वाचित विधायक समय मांगता है, तो हमें संविधान और कानून के तहत उसे देना पड़ता है। क्या हम मना कर सकते हैं? नहीं।’’

पुनर्गणना से जुड़े राजनीतिक और कानूनी विवाद के कारण देरी के आरोपों पर खादर ने कहा कि यह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

अध्यक्ष ने कहा, ‘‘मेरा काम संविधान और नियमों के अनुसार कार्य करना है। जो भी उनका अधिकार है, वह जल्द ही दिया जाएगा।’’

उन्होंने यह भी कहा कि बिना पूरी प्रक्रिया के जल्दबाजी में शपथ दिलाने से कानूनी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।

इस बीच, कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने अध्यक्ष पर जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाया और राज्यपाल थावरचंद गहलोत से हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जरूरत पड़े तो राज्यपाल स्वयं शपथ दिलाएं।

मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने इस प्रक्रिया को जीवराज द्वारा ‘वोट डकैती’ करार दिया और कहा कि शृंगेरी के नवनिर्वाचित विधायक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।

वहीं, जीवराज ने पुनर्गणना प्रक्रिया का बचाव करते हुए किसी भी तरह की छेड़छाड़ के आरोपों से इनकार किया, जबकि उच्च न्यायालय ने डाक मतपत्र मामले में उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी पर रोक लगा दी है।

भाषा गोला सुरेश

सुरेश


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