कोलकाता, 29 सितंबर (भाषा) कोलकाता में दुर्गा पूजा का एक पंडाल हजारों किलोग्राम पुराने अखबारों का इस्तेमाल कर पौराणिक कथाओं, इतिहास और बदलती पढ़ने की आदतों पर आधारित एक कलाकृति के रुप में तैयार किया जा रहा है।
बागुईआटी रेल पोखुर यूनाइटेड क्लब ने अपनी दुर्गा पूजा के 73वें आयोजन के लिए पंडाल की थीम के रूप में ‘कोलाज’ को चुना है, जिसकी संकल्पना कलाकार सोमनाथ तमली ने की है।
क्लब के सचिव स्नेहाशीष देबनाथ ने कहा कि पंडाल तैयार करने के लिए अखबारों के पन्नों, तस्वीरों और अलग-अलग बनावटों का इस्तेमाल किया गया है, जिससे अलग-अलग तत्वों के एक साथ आकर एक बड़ी कहानी का रूप लेने के विचार को साकार रूप दिया गया है।
उन्होंने बताया कि यह थीम देवी दुर्गा की सृष्टि की पारंपरिक कथा से भी प्रेरित है, जिसमें विभिन्न देवता अपनी दिव्य शक्तियों और अस्त्र-शस्त्रों का योगदान देते हैं और उनसे देवी दुर्गा का पूर्ण एवं शक्तिशाली स्वरूप बनता है।
उन्होंने कहा कि इस कलाकृति में इन व्यक्तिगत योगदानों को ऐसे हिस्सों के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो एक साथ आने पर अधिक महत्व हासिल करते हैं। यह कोलाज की अवधारणा को समाज और सामूहिक शक्ति तक विस्तार देता है।
पंडाल में बंगाल और भारत की सांस्कृतिक, बौद्धिक और सामाजिक विरासत में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली विभूतियों को भी श्रद्धांजलि दी जाएगी, जिनमें रवींद्रनाथ टैगोर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सत्यजीत रे, सत्येंद्र नाथ बोस, मातंगिनी हाजरा, ईश्वर चंद्र विद्यासागर और स्वामी विवेकानंद शामिल हैं।
अखबार इस कलाकृति की एक अन्य महत्वपूर्ण परत हैं। इसमें अखबारों के बड़े पैमाने पर परिवहन और साइकिलों से उनके वितरण के दृश्यों को दर्शाया गया है, जो बीते दौर की अखबार संस्कृति को फिर से जीवंत करते हैं।
यह कलाकृति प्रिंट से डिजिटल मीडिया की ओर बदलाव और समाचार तथा सूचनाओं के इस्तेमाल एवं साझा किए जाने के बदलते तरीकों को भी दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि पुनर्चक्रित अखबारों का इस्तेमाल लुप्त होती पढ़ने और समाचार साझा करने की संस्कृति को सम्मान देने के लिए भी किया गया है, जो उस दौर की याद दिलाता है जब अखबार रोजमर्रा की जिंदगी का अभिन्न हिस्सा हुआ करते थे।
भाषा तान्या वैभव
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