लखीमपुर की अध्यापिका मोदी को लिखे पत्र का जवाब पाकर उत्साहित

लखीमपुर की अध्यापिका मोदी को लिखे पत्र का जवाब पाकर उत्साहित

लखीमपुर की अध्यापिका मोदी को लिखे पत्र का जवाब पाकर उत्साहित
Modified Date: January 10, 2026 / 08:32 pm IST
Published Date: January 10, 2026 8:32 pm IST

लखीमपुर खीरी (उप्र), 10 जनवरी (भाषा) लखीमपुर खीरी जिले के डान वास्को इंटर कॉलेज की अध्यापिका अरुणा श्री (42) उस समय बेहद प्रसन्न और उत्साहित हो गईं जब उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पिछले महीने भेजे गए अपने पत्र का जवाब मिला।

अरुणा ने बताया कि उन्हें एलपीजी सिलेंडरों की बेहतर डिलीवरी की प्रशंसा करते हुए लिखे गए पत्र का जवाब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिला है।

राजाजीपुरम इलाके की निवासी और डॉन बोस्को इंटर कॉलेज में शिक्षिका अरुणा श्री ने बताया कि पिछले महीने उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था, क्योंकि फोन करने के मात्र 15 मिनट के भीतर ही उन्हें भरा हुआ एलपीजी सिलेंडर मिल गया था।

 ⁠

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “जब कंपनी के प्रतिनिधि ने फोन करने के 15 मिनट के भीतर ही मुझे एलपीजी सिलेंडर सौंप दिया, तो मुझे यह देखकर आश्चर्य हुआ कि सरकार के प्रयासों से चीजें कितनी आसान हो गई हैं।”

उन्होंने कहा कि “भावनाओं से भरकर मैंने भारत के प्रधानमंत्री को पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने हमारे दैनिक जीवन को इतना आसान और सुविधाजनक बनाने के लिए धन्यवाद दिया।”

उन्होंने आगे बताया कि जब प्रधानमंत्री ने उनके पत्र का जवाब दिया और महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रमों और योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की, तो उन्हें और भी अधिक प्रसन्नता हुई।

तीन विषयों में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त अरुणा श्री ने अपने बचपन के अनुभवों को याद करते हुए बताया कि एलपीजी कनेक्शन लेना या सिलेंडर आपूर्ति सुनिश्चित करवाना पहले बहुत मुश्किल काम हुआ करता था।

उन्होंने कहा, “मेरे भाई मुझे शहर से काफी दूर नौरंगाबाद इलाके में स्थित एलपीजी सिलेंडर गोदाम तक ले जाया करते थे, क्योंकि लड़की होने के कारण मुझे अलग कतार में खड़ा होना पड़ता था, जिससे उन्हें सिलेंडर लेने में थोड़ी आसानी हो जाती थी।”

उन्होंने कहा कि नागरिक सेवाओं के डिजिटलीकरण से सेवाओं की गुणवत्ता में स्पष्ट सुधार दिखाई देता है। उन्होंने कहा, “इसका श्रेय हमारे प्रधानमंत्री और उनकी सरकार को जाता है।”

भाषा सं आनन्द संतोष

संतोष


लेखक के बारे में