वकील इंदिरा जयसिंह नयी किताब में उजागर करेंगी महत्वपूर्ण मुकदमों के अनुभव
वकील इंदिरा जयसिंह नयी किताब में उजागर करेंगी महत्वपूर्ण मुकदमों के अनुभव
नयी दिल्ली, 28 अप्रैल (भाषा) रूपन देओल बजाज द्वारा के पी एस गिल के खिलाफ दायर छेड़छाड़ के मामले में जीत हासिल करने से लेकर शबरिमला मामले में महिलाओं के पूजा-अधिकार की पैरवी तक, उच्चतम न्यायालय की वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता इंदिरा जयसिंह आगामी संस्मरण में पांच दशकों से अधिक के अपने जीवन को याद करती नजर आएंगी।
हार्परकॉलिन्स इंडिया द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘‘द कॉन्स्टिट्यूशन इज माय होम’’ में जयसिंह देश की कुछ सबसे महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाइयों का विश्लेषण करती हैं और ‘‘वर्तमान पर तीखी टिप्पणियां’’ करती हैं। इन टिप्पणियों में बढ़ते हिंदू राष्ट्रवाद, पीछे हटती न्यायपालिका और दिन-प्रतिदिन कमजोर होती लोकतांत्रिक व्यवस्था जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया है।
हार्परकॉलिन्स इंडिया ने मंगलवार को कहा कि नारीवादी प्रकाशक और लेखिका रितु मेनन के साथ बातचीत के आधार पर लिखी गई यह किताब उन मामलों और मुद्दों पर प्रकाश डालती है जिन्होंने जयसिंह के करियर को परिभाषित किया है। इनमें मैरी रॉय का समान उत्तराधिकार के लिए संघर्ष; ओल्गा टेलिस मामला, जिसने फुटपाथ पर रहने वालों के लिए आजीविका के अधिकार को मान्यता दी; शायरा बानो और तीन तलाक को चुनौती; भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के लिए मुआवजे का मामला; और शबरिमला मामला शामिल हैं।
जयसिंह ने एक बयान में कहा, ‘‘किसी राष्ट्र का इतिहास कानून का इतिहास भी होता है। लेकिन एक समय ऐसा आता है जब राष्ट्र अपने अतीत से पूर्णतः नाता तोड़ लेता है। भारत के संविधान को अपनाना ऐसा ही एक क्षण था। मैं आज संविधान की पुत्री के रूप में यहां खड़ी हूं, और मुझे आशा है कि इस किताब को पढ़ने वालों को इसमें कुछ न कुछ मूल्यवान ज्ञान प्राप्त होगा।’’
‘कमीशनिंग एडिटर’ ईशा बनर्जी ने कहा कि इंदिरा जयसिंह पाठकों को इन ‘‘लंबी और कठिन कानूनी लड़ाइयों’’ के पीछे की कहानी तक ले जाती हैं। यह किताब पाठकों के लिए 20 मई को उपलब्ध होगी।
भाषा आशीष मनीषा
मनीषा

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