लुधियाना घटना: सुरक्षा अभियान के बीच विशेषज्ञों ने खराब रखरखाव का उल्लेख कारणों के तौर पर किया
लुधियाना घटना: सुरक्षा अभियान के बीच विशेषज्ञों ने खराब रखरखाव का उल्लेख कारणों के तौर पर किया
(जीवन प्रकाश शर्मा)
नयी दिल्ली, आठ जून (भाषा) कुछ रेलवे विशेषज्ञों ने यात्री कोच के “खराब रखरखाव” को ट्रेन परिचालन के दौरान कोच के अलग होने (अनकपलिंग) की घटनाओं का प्रमुख कारण बताया है। यह टिप्पणी लुधियाना रेलवे स्टेशन पर छह जून को हुई ऐसी ही एक घटना के बाद आयी है।
लुधियाना में तब एक बड़ा हादसा टल गया था, जब कटरा जा रही मालवा एक्सप्रेस के दो डिब्बों को जोड़ने वाला ‘कपलिंग’ लुधियाना में अचानक अलग हो गया था। हालांकि, इस घटना में एक कोच को काफी नुकसान पहुंचा था।
घटना के एक दिन बाद रेल मंत्रालय ने एक सुरक्षा अभियान शुरू करते हुए सभी जोनल रेलवे को जंग लगे या क्षतिग्रस्त महत्वपूर्ण पुर्जों वाले यात्री कोच की पहचान करने के निर्देश दिए थे।
एक रेलवे विशेषज्ञ ने कहा, “घटना की तस्वीरों से स्पष्ट है कि कोच का निचला हिस्सा और वह हिस्सा, गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त था, जहां वह अन्य कोच से जुड़ता है।”
उन्होंने कहा, “जब चलती ट्रेन में ‘कपलिंग’ टूटती है, तो खिंचाव की अत्यधिक ताकत कोच के मुख्य ढांचे पर भारी दबाव डालती है। यदि धातु जंग या पुराना होने के कारण कमजोर हो चुकी हो, तो वह ऐसे ही टूट सकती है।”
पिछले कुछ वर्षों में कोच के अलग होने की घटनाओं ने यात्री ट्रेनों की परिचालन सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं उत्पन्न हुई हैं।
यह मुद्दा अगस्त 2025 में पुरी में आयोजित प्रधान मुख्य यांत्रिक अभियंता सम्मेलन में भी उठाया गया था, जहां एलएचबी कोच में झटकों और कोच अलग होने की घटनाओं को रोकने के लिए कपलर डिजाइन में सुधार और रखरखाव को प्राथमिकता वाला क्षेत्र माना गया था।
वर्ष 2024 में किसान एक्सप्रेस और मगध एक्सप्रेस में भी कोच अलग होने की दो बड़ी घटनाओं ने रेलवे का ध्यान महत्वपूर्ण पुर्जों के खराब रखरखाव और जंग की समस्या की ओर खींचा था।
कारणों पर प्रकाश डालते हुए रेलवे ने पहले कहा था कि संचालन के दौरान कोच के अलग होने की घटनाएं कई कारणों से हो सकती हैं, जिनमें सही तरीके से ‘कपलिंग’ नहीं किया जाना, सामग्री की गुणवत्ता, प्रतिकूल मौसम से जंग और परिचालन के दौरान घिसावट शामिल हैं।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में एक प्रश्न के उत्तर में पहले कहा था, “उक्त ट्रेनों से जुड़ी घटनाएं कपलर के एक घटक में जंग के कारण हुई थीं। विस्तृत जांच के बाद ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए अधिक जंग-प्रतिरोधी सामग्री विनिर्देश लागू किए गए।”
उन्होंने कहा था कि अमृत भारत और वंदे भारत ट्रेन में उपयोग के लिए उन्नत सेमी-ऑटोमैटिक कपलर भी विकसित किए गए हैं, जो कोच को स्वचालित रूप से जोड़ने में सक्षम हैं।
विशेषज्ञों ने अन्य कारणों का उल्लेख करते हुए कहा कि धातु में कमजोरी, जो अक्सर सूक्ष्म दरारों के रूप में होती है, लगातार झटकों और दबाव के कारण विकसित हो सकती है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी खामियों का पता अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन (यूएसएफडी) जांच में नहीं चल पाता है, तो अत्यधिक दबाव में ‘कपलिंग’ फेल हो सकती है।
भाषा अमित दिलीप
दिलीप

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