एसआईआर के दौरान ‘अमानवीय’ आचरण के खिलाफ अदालत का रुख करूंगी: ममता बनर्जी

एसआईआर के दौरान ‘अमानवीय’ आचरण के खिलाफ अदालत का रुख करूंगी: ममता बनर्जी

एसआईआर के दौरान ‘अमानवीय’ आचरण के खिलाफ अदालत का रुख करूंगी: ममता बनर्जी
Modified Date: January 5, 2026 / 07:08 pm IST
Published Date: January 5, 2026 7:08 pm IST

(फोटो सहित)

सागर द्वीप (पश्चिम बंगाल), पांच जनवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को कहा कि वह राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान किए गए ‘‘अमानवीय’’ आचरण के खिलाफ अदालत का रुख करेंगी।

दक्षिण 24 परगना जिले के सागर द्वीप में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया से जुड़े भय, उत्पीड़न और प्रशासनिक मनमानी के कारण कई लोगों की मौत हुई है और कई लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है।

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बनर्जी ने आरोप लगाया कि 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने के लिए प्रौद्योगिकी का ‘‘हथियार’’ के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि लोकतांत्रिक सुरक्षा उपायों को कमजोर करते हुए, मतदाता सूचियों से मनमाने ढंग से नाम हटाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और अनौपचारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम एसआईआर के कारण हुए अमानवीय व्यवहार और इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौत के खिलाफ अदालत में कल याचिका दायर करेंगे।’’

बनर्जी ने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो वह कानूनी लड़ाई को और आगे बढ़ाने को तैयार हैं। हालांकि, बनर्जी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि याचिका वह दायर करेंगी, राज्य सरकार द्वारा दायर की जाएगी या तृणमूल कांग्रेस द्वारा।

बनर्जी ने कहा कि वह उच्चतम न्यायालय में वकील के तौर पर नहीं बल्कि एक आम नागरिक के तौर पर पेश होने की अनुमति मांगेगी। उन्होंने कहा, ‘‘जरूरत पड़ने पर मैं उच्चतम न्यायालय जाऊंगी और जनता के लिए पैरवी करूंगी। मैं जनता की आवाज बनूंगी।’ उन्होंने यह भी याद दिलाया कि उन्होंने कानूनी शिक्षा प्राप्त की है।

एसआईआर के पीछे ‘‘तकनीकी साजिश’’ का आरोप लगाते हुए, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने दावा किया कि अपारदर्शी डिजिटल प्रक्रियाओं ने उचित व्यवस्था का स्थान ले लिया है। उन्होंने कहा, ‘‘अब एआई का उभार हो चुका है। तस्वीरों और आवाजों का इस्तेमाल करके झूठ फैलाया जा सकता है। एआई का इस्तेमाल करके नाम हटाए जा रहे हैं।’’

बनर्जी ने आरोप लगाते हुए कहा, ‘एआई यह तय कर रहा है कि किसका उपनाम बदला है, किसकी शादी हुई है, कौन सी लड़की अपने ससुराल गई है। एक हत्यारे को भी अपना बचाव करने का मौका मिलता है। यहां लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं।’’

उन्होंने यह भी कहा कि कानूनी विकल्पों के माध्यम से जवाब देने का पर्याप्त अवसर दिए बिना ही 54 लाख नाम हटा दिए गए।

उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ‘‘व्हाट्सएप पर चलाया जा रहा है’’, और चेताया कि मतदान अधिकारों के हनन के राजनीतिक परिणाम होंगे।

उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘अगर लोगों के अधिकार छीन लिए गए, तो आप भी गायब हो जाएंगे, गायब हो जाएंगे कुमार!’’

उन्होंने नागरिकों से कठिनाइयों के बावजूद मतदाता सूची में अपना नाम देखने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, ‘‘यह अस्तित्व और अधिकारों की रक्षा का संघर्ष है।’’

एक दिन पहले, ममता बनर्जी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पत्र लिखकर राज्य में जारी मतदाता सूची के कथित ‘मनमाने’ और ‘त्रुटिपूर्ण’ विशेष गहन पुनरीक्षण को तुरंत रोकने का आग्रह करते हुए चेतावनी दी थी कि इससे बड़े पैमाने पर मतदाताओं के मताधिकार का हनन हो सकता है तथा भारतीय लोकतंत्र की नींव को ‘अपूरणीय क्षति’ पहुंच सकती है।

बनर्जी ने जनसभा में आरोप लगाया कि बुजुर्गों को, जिन लोगों के पैरों पर प्लास्टर लगा है, जिन्हें हाल में अस्पतालों से छुट्टी मिली है, उन्हें कतारों में लगने को मजबूर किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘दो महीनों में लगभग 70 लोगों की मौत हो चुकी है। क्या किसी को दुख नहीं होता? अगर आपकी 85 वर्षीय मां को एम्बुलेंस में घसीटकर ले जाया जाए, तो दिल्ली के नेता क्या जवाब देंगे?’’

बनर्जी ने सवाल उठाया कि क्या नाम हटाने का आदेश देने वालों के पास खुद उनके माता-पिता के प्रमाण पत्र हैं?

उन्होंने इस प्रक्रिया की जल्दबाजी पर सवाल उठाते हुए कहा कि मतदाता सूची में पुनरीक्षण को कुछ महीनों में हड़बड़ी में करने के बजाय दो साल में किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘हम चाहते हैं कि नाम शामिल किए जाएं, न कि हटाए जाएं। यह जबरदस्ती क्यों?’

बनर्जी ने आरोप लगाया कि बिना वैध कारणों के मतदाता सूची से नामों को ‘‘मनमाने ढंग से’’ हटाया जा रहा है, जिससे विधानसभा चुनावों से पहले एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया डर पैदा करने वाली प्रक्रिया बन गई है।

बनर्जी ने भाजपा शासित राज्यों में बांग्ला भाषी प्रवासी श्रमिकों के साथ कथित भेदभाव का भी आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘मैं उन्हें मुझे जान से मारने की चुनौती देती हूं, लेकिन मैं अपनी मातृभाषा बोलना बंद नहीं करूंगी।’

उन्होंने यह भी पूछा कि क्या देश में बांग्ला बोलना अपराध बन गया है?

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) चुनाव से पहले लोगों को प्रलोभन देती है और चुनाव जीतने के बाद दमनकारी कार्रवाई करती है। उन्होंने कहा, ‘‘वे चुनाव से पहले 10,000 रुपये देते हैं और चुनाव खत्म होने के बाद बुलडोजर चला देते हैं।’’

निर्वाचन आयोग और भाजपा ने मनमानी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि एसआईआर एक नियमित प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य सटीक मतदाता सूची सुनिश्चित करना है।

भाषा आशीष नरेश

नरेश


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