ममता ने मोदी को ‘सबसे बड़ा घुसपैठ करने वाला’’ करार दिया

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ममता ने मोदी को ‘सबसे बड़ा घुसपैठ करने वाला’’ करार दिया

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  • Publish Date - March 21, 2026 / 06:49 PM IST,
    Updated On - March 21, 2026 / 06:49 PM IST

(शीर्षक में बदलाव के साथ)

(तस्वीरों के साथ)

कोलकाता, 21 मार्च (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उस पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के माध्यम से लोगों के ‘मतदान अधिकार छीनने’ का आरोप लगाया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ‘‘सबसे बड़ा घुसपैठ’’ करने वाला करार दिया।

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता ने कोलकाता के प्रतिष्ठित रेड रोड पर ईद की नमाज के बाद नमाजियों को संबोधित करते हुए आगामी विधानसभा चुनावों को लोकतांत्रिक अधिकारों और बंगाल के बहुल सामाजिक ताने-बाने की रक्षा की लड़ाई करार दिया।

ममता ने कहा, ‘‘हम मोदी जी और भाजपा को आपके मतदान के अधिकार छीनने नहीं देंगे। हम अंत तक लड़ेंगे।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने के लिए उन्होंने कोलकाता से लेकर दिल्ली तक की अदालतों का रुख किया है।

उनकी ये टिप्पणी निर्वाचन आयोग द्वारा कराई जा रही एसआईआर प्रक्रिया को लेकर बढ़ते राजनीतिक टकराव के बीच आई है। तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि एसआईआर के कारण वैध मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं, खासकर अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों से।

उन्होंने कहा, ‘‘जब आप विदेश जाते हैं, तो नेताओं से हाथ मिलाते हैं और मित्रता की बातें करते हैं। यह आपकी पसंद है, और मैं सभी देशों का सम्मान करती हूं। लेकिन जब आप भारत लौटते हैं, तो अचानक हिंदू-मुस्लिम विवाद शुरू हो जाता है, और लोगों को घुसपैठिया कहा जाने लगता है।’’

ममता ने मोदी और भाजपा द्वारा सीमावर्ती राज्य में घुसपैठ के बार-बार लगाए जा रहे आरोपों को लेकर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा, ‘‘आप फिर नाम हटाने और लोगों को घुसपैठिया करार देने की बात करते हैं। मैं कहूंगी कि आप और आपकी सरकार सबसे बड़ी घुसपैठ करने वाले हैं।’’

पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होगा। ममता बनर्जी ने इस अवसर का उपयोग अपनी पार्टी के उस चुनावी विमर्श को मजबूत करने के लिए किया कि भाजपा संस्थागत तंत्र और ध्रुवीकरण करने वाली बयानबाजी के माध्यम से चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है।

बंगाल में घुसपैठ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रमुख चुनावी मुद्दों में से एक बनकर उभरा है। केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी के नेता बार-बार तृणमूल सरकार पर अपने अल्पसंख्यक वोट बैंक को मजबूत करने के लिए पड़ोसी बांग्लादेश से घुसपैठ को बढ़ावा देने का आरोप लगा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘एसआईआर प्रक्रिया के दौरान कई लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। मैंने कलकत्ता उच्च न्यायालय और यहां तक ​​कि उच्चतम न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया है। मुझे अब भी उम्मीद है कि लोगों के अधिकारों की रक्षा की जाएगी।’’

मुख्यमंत्री ने सख्त लहजे में आरोप लगाया कि केंद्र ने राज्य में ‘‘अघोषित राष्ट्रपति शासन’’ लागू कर दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘आपने हमारी सरकार पर कब्जा कर लिया है और अनौपचारिक राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया है। लेकिन हम डरेंगे नहीं।’’

रेड रोड पर होने वाला वार्षिक ईद समागम पूर्वी भारत के इस प्रकार के सबसे बड़े आयोजनों में से एक है। यह चुनावी वर्ष में अक्सर राजनीतिक मंच के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, जिससे दलों को राज्य के बड़े मुस्लिम मतदाता वर्ग तक पहुंचने का अवसर मिलता है। यह वर्ग राज्य की आबादी का करीब 30 प्रतिशत है। इस वर्ष के आयोजन का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है, क्योंकि राज्य में अहम विधानसभा चुनाव होने हैं।

ममता ने स्वयं को सभी समुदायों के अधिकारों की रक्षक के रूप में भी पेश करने की कोशिश की।

उन्होंने कहा, ‘‘भले ही कोई आपके साथ खड़ा न हो, मैं आपके परिवार के सदस्य के रूप में बंगाल के लोगों के साथ – धर्मों, जातियों और पंथों से परे – खड़ी रहूंगी।’’

ममता ने अपने संबोधन में राज्य को राजनीतिक रूप से निशाना बनाने का प्रयास करने वाले लोगों को कड़ी चेतावनी दी।

उन्होंने कहा, ‘‘जो लोग बंगाल को निशाना बना रहे हैं और लोगों को बांटने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें नरक में भेज दिया जाएगा।’’

मुख्यमंत्री ने सांप्रदायिक सौहार्द की पश्चिम बंगाल की पुरानी परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज का ध्रुवीकरण करने की कोशिश करने वाली ताकतों को राज्य सफल नहीं होने देगा।

उन्होंने कहा, ‘‘बंगाल एकता में विश्वास करता है। हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई — यहां सभी साथ रहते हैं। हम किसी को भी इस सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने नहीं देंगे।’’

तृणमूल सुप्रीमो ने भाजपा पर निशाना साधते हुए नारा दिया, ‘‘भाजपा हटाओ, देश बचाओ।’’ इस वर्ष ईद का यह उत्सव विशेष राजनीतिक महत्व रखता है, क्योंकि यह विधानसभा चुनावों से कुछ सप्ताह पहले हो रहा है। तृणमूल लगातार चौथी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रही है, जबकि भाजपा राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास कर रही है।

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने नमाजियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री के संदेश को दोहराया कि बंगाल की सामाजिक सद्भाव की रक्षा की जाएगी।

डायमंड हार्बर के सांसद ने कहा, ‘‘बंगाल की सांप्रदायिक सद्भाव की रक्षा की जाएगी। समुदायों को बांटने के प्रयास विफल होंगे।’’

उन्होंने आक्रामक लहजे में कहा, ‘‘गर्दन काटेगा पर झुकेगा नहीं।’’

भाजपा हालांकि बनर्जी की इस टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन पर संवैधानिक पदों की गरिमा को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया।

भाजपा विधायक और राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने कहा, ‘‘जो कोई भी देश की प्रधानमंत्री को घुसपैठिया कहता है, वह संवैधानिक पद पर रहने के योग्य नहीं है। मुझे लगता है कि उनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया है, उन्हें तुरंत रांची जाना चाहिए।’’

पार्टी ने मतदाता सूची के एसआईआर के संबंध में तृणमूल कांग्रेस के आरोपों को भी खारिज कर दिया और दावा किया कि निर्वाचन आयोग द्वारा यह प्रक्रिया मतदाताओं के नाम के दोहराव को समाप्त करने और अपात्र लोगों को हटाने के लिए की जा रही है।

राज्य की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होंगे। मतगणना चार मई को होगी।

भाषा

धीरज माधव

माधव

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